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सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाई कोर्ट और निचली अदालतों द्वारा लगाए गए जमानत के शर्तो पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा की अदालतों द्वारा दलित और आदिवासी आरोपियों को जमानत के बदले पुलिस स्टेशन की सफाई करने के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है. जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने इन शर्तों को अमानवीय और अपमानजनक बताते हुए भविष्य में ऐसा न करने का निर्देश दिया है.

SC slams Odisha Courts over 'Clean Police Station' Bail Condition for Dalits & Tribals
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाई कोर्ट और निचली अदालतों द्वारा लगाए गए जमानत के शर्तो पर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने मामला सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया था. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह नाराजगी जताई है. कोर्ट ने जमानत की शर्त के तौर पर ज्यादातर आदिवासी और दलित आरोपियों को थाने की सफाई करने के आदेश पर यह नाराजगी जताई है.

शर्तों को बताया अमानवीय और अपमानजनक

सीजेआई सूर्यकांत ने इन शर्तों को अमानवीय, अपमानजनक और घृणित बताया है. साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य में इस तरह की शर्तें दोबारा नहीं रखनी चाहिए. ओडिशा के रायगड़ा जिले में खनन-विरोधी प्रदर्शनों को 2023 में अपराध की श्रेणी में रखना शुरू किया गया, जब वेदांता परियोजना का विरोध कर रहे दलित और आदिवासी ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया. तब से कम से कम 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अदालतों ने कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों को जमानत की शर्तों के तौर पर पुलिस थाने साफ करने का आदेश दिया था.

क्या है आरोप?

याचिककर्ताओ का आरोप है कि जमानत द्वारा लगाई गई शर्ते सवर्ण और ओबीसी जातियों के जजों द्वारा ही लगाए गए हैं. ओडिशा हाई कोर्ट द्वारा 28 मई 2025 को पारित आदेश का जिक्र किया गया, जिसमें कुमेश्वर नायक नामक व्यक्ति को दो महीने तक प्रत्येक दिन सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच काशीपुर पुलिस स्टेशन परिसर की सफाई करने का निर्देश दिया था.

खनन विरोधी प्रदर्शनों से उत्पन्न मामलों से जुड़ा मामला

रिपोर्ट के मुताबिक मई 2025 और जनवरी 2026 के बीच ऐसे आठ आदेश पारित किए गए. इनमें से सात आदेश रायगड़ा जिला अदालत द्वारा दिया गया, जबकि एक आदेश हाई कोर्ट द्वारा पारित किया गया. आर्टिकल 14 द्वारा 27 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार इनमें से कई आदेश राज्य में खनन विरोधी प्रदर्शनों से उत्पन्न मामलों से जुड़े थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि पहचाने गए आठ मामलों में से छह व्यक्ति दलित समुदाय से थे, जबकि दो आदिवासी थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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