Mamata Banerjee Defeat Reasons In Bengal
Mamata Banerjee Defeat Reasons In Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं. इस चुनाव में बीजेपी पिछले 15 सालों से सत्ता पर काबिज टीएमसी को काफी पीछे छोड़ दी है. बीजेपी प्रचंड बहुमत से बंगाल की सत्ता पर विराजने जा रही है. भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में जनता का यह बदला मूड बहुत कुछ कह रहा है. शाम 5 बजे तक बीजेपी 200 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं टीएमसी 90 सीटों के आसपास सिमटती दिख रही है. आखिर वो कौन-कौन से कारण रहे जिन्होंने बंगाल में ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बीजेपी की तरफ जाने के लिए मतदाताओं को प्रेरित किया.
आज से 15 साल पहले कभी लेफ्ट का मजबूत किला रहे बंगाल से ममता बनर्जी ने लाल झंडे को उखाड़ फेंका था. ममता बनर्जी तब से लगातार बंगाल में निर्विरोध शासन चला रही थीं. अब साल 2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी विदाई तय है. इसमें सबसे प्रमुख कारण उनका धार्मिक ध्रुवीकरण, भ्रष्टाचार, सत्ता विरोधी लहर, बंगाल में फैली बेरोजगारी, महिला सुरक्षा रहा.
महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे पर कैसे फेल हुईं ममता
ममता बनर्जी के शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की खबरें लगातार आती रहीं. अप्रैल 2025 में वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम के विरोध में मुर्शिदाबाद में ना सिर्फ जमकर हिंसा और तोड़फोड़ हुई, बल्कि NCW की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसी खबरें भी आई. इसके चलते कई परिवारों को अपना घर छोड़कर विस्थापन शिविरों में शरण लेना पड़ा. ये सभी महिलाएं हिंदू समुदाय से आती थीं.
वहीं चुनाव से चंद महीने पहले ही कोलकाता के प्रतिष्ठित आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के साथ रेप के बाद हत्या मामले ने भी सरकार को बैकफुट पर लाने का काम किया. इस घटना के बाद पूरे देश में महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा जनाक्रोश देखने को मिला. बीजेपी ने इस घटना से जुड़ी पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को पनिहाटी सीट से बीजेपी का टिकट तक दे दिया. ममता बनर्जी की कभी ताकत रही महिलाएं इस बार उनका साथ छोड़ दीं. इसका परिणाम आज चुनावी रुझानों में दिख रहा है.
धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति ने पहुंचाया चोट
15 सालों से बंगाल की सत्ता पर अपनी मजबूती से पकड़ बनाए रखने वाली ममता बनर्जी पर लगातार मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे. जिस मुद्दे को बीजेपी लगातार उठाती रही. इसकी एक बानगी दुर्गा पूजा के दौरान देखने को मिली. जहां पूजा पंडाल के अंदर मुस्लिम गीतों को गाया जा रहा था. इस दौरान ममता बनर्जी खुद वहां मौजूद रहीं. इस मामले को बीजेपी ने बड़े ही जोर-शोर से उठाया. बीजेपी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की धार्मिक और एतिहासिक पहचान को मिटा रही हैं. बीजेपी ने इस हिंदू पहचान को बंगाली अस्मिता से जोड़कर TMC को बड़ा सेटबैक दिया.
भ्रष्टाचार ने खोखली की ममता की बादशाहत
बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों की मानें तो पश्चिम बंगाल में इस बार जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर देखने को मिल रही थी. राज्य में पिछले कुछ सालों में भयंकर भ्रष्टाचार और घोटाले हुए. जिसमें मुख्य रूप से सरकारी नौकरियों की भर्ती में सरकार के लोगों की भूमिका ने जनता के मन में ममता बनर्जी की इमेज बेहद खराब कर दी. इससे मध्यम वर्ग के लोग और युवा काफी नाराज हो गए. बीजेपी ने अपने प्रचार अभियानों में भी इन मुद्दों को खूब उठाया. जिसका फायदा अब बीजेपी को दिख रहा है.
वामदल, कांग्रेस और टीएमसी का विकल्प बनी बीजेपी
बंगाल की सत्ता पर सालों तक राज करने वाले वामदल और टीएमसी इस चुनाव में पूरी तरह धाराशायी दिखे. एक तरफ टीएमसी से नाराज मतदाता बीजेपी की तरफ शिफ्ट हुए तो दूसरी तरफ कभी कांग्रेस और लेफ्ट के मतदाता रहे लोगों ने इस बार बीजेपी के लिए मतदान करने बाहर निकले. बीजेपी खुद को इन पार्टियों के विकल्प के रूप में पेश करने में सफल रही. वोटिंग पैटर्न में हुए इस बदलाव ने बीजेपी को बंगाल में निर्णायक भूमिका निभाई.
ये भी पढ़ें- ममता के ‘खेला होबे’ पर भारी पड़ा बीजेपी का ‘कमल मेला’, जानिए सुनील बंसल जैसे रणनीतिकारों ने बंगाल में कैसे इतिहास रचा
बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझान यह बता रहे हैं कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि मतदाताओं की प्राथमिकता और उनके वैचारिक बदलाव को दर्शा रहा है. अब सबकी नजरें आज के अंतिम नतीजों पर है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
