दुनियाभर में बढ़ते तनाव और हिंसा के बीच शांति की तलाश अब हिमालय की गोद तक पहुंच गई है. अहिंसा विश्व भारती और विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश मुनि के नेतृत्व में ‘वी सपोर्ट पीस’ (WE SUPPORT PEACE) अभियान लद्दाख पहुंचा. 7 मई 2026 को लद्दाख की पवित्र वादियों में विभिन्न धर्मों के प्रमुख गुरुओं ने एक साथ जुड़कर पूरी दुनिया को भाईचारे और सद्भावना का संदेश दिया. यह आयोजन भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की परंपरा का एक जीवंत उदाहरण बना.
शांति केवल आदर्श नहीं, समय की जरूरत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि आज की दुनिया युद्ध, आतंकवाद और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. ऐसी स्थिति में शांति केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन गई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि असली शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह प्रेम, करुणा और आपसी सम्मान की गहरी भावना है. जब तक इंसान के मन में संतोष नहीं होगा, तब तक विश्व में शांति स्थापित करना संभव नहीं है.

एक मंच पर जुटे कई धर्मों के दिग्गज
लद्दाख के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सर्वधर्म सद्भाव की अद्भुत झलक देखने को मिली. महाबोधि अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्र के संस्थापक भिक्षु संघसेना, भृगु फाउंडेशन के गोस्वामी सुशील जी महाराज और ऑल इंडिया इमाम संगठन के डॉ. उमर अहमद इलियासी ने एक सुर में शांति की अपील की. इनके अलावा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के परमजीत सिंह चंडोक, बहाई मंदिर के डॉ. ए.के. मर्चेंट और ब्रह्मकुमारी संस्था की डॉ. बिन्नी सरीन भी मौजूद रहीं.
लद्दाख बना आध्यात्मिक एकता का केंद्र
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि कैसे बौद्ध भिक्षुओं और स्थानीय लोगों ने सभी धर्मगुरुओं का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया. हिमालय की ऊंचाइयों से गूंजा यह शांति का संदेश उन इलाकों तक पहुंचने की कोशिश है, जहां आज भी हिंसा और भेदभाव मौजूद है. सभी गुरुओं ने माना कि धर्म का असली मकसद इंसानियत की सेवा और विश्व में एकता बनाए रखना है.
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