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उत्तर-दक्षिण नहीं, ‘पूर्व-पश्चिम’ की खाई है बड़ी समस्या; संजीव सान्याल ने बताया पूर्वी भारत के पिछड़ने का कारण

प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल के अनुसार भारत की वास्तविक आर्थिक चुनौती उत्तर-दक्षिण नहीं, बल्कि पूर्व-पश्चिम असमानता है.

प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य और प्रमुख अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने कहा है कि भारत में लंबे समय से चर्चित उत्तर-दक्षिण आर्थिक बहस से कहीं अधिक गंभीर समस्या पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच की खाई है. पूर्वी भारत पश्चिमी हिस्से की तुलना में काफी पिछड़ा और गरीब है, और इस असमानता को दूर करने के लिए कोलकाता को फिर से मजबूत आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करना होगा.

सान्याल ने हाल ही में मुंबई में अपने संबोधन में यह बात कही. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की आर्थिक वृद्धि कुछ चुनिंदा उच्च-वृद्धि वाले शहरी केंद्रों पर निर्भर करती है. दक्षिण भारत में बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई; पश्चिम में मुंबई, पुणे और अहमदाबाद; तथा उत्तर में दिल्ली-एनसीआर जैसे हब विकास को गति देते हैं. लेकिन पूर्वी भारत में ऐसा कोई मजबूत शहरी इंजन नहीं है, जिसके कारण पूरा क्षेत्र पिछड़ गया है.

पूर्व-पश्चिम विभाजन की वास्तविकता

सान्याल ने वर्षों से यह तर्क दिया है कि असली विभाजन पूर्व-पश्चिम है. पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पूर्वोत्तर राज्य) में औद्योगिक गतिविधियां, निवेश और रोजगार के अवसर पश्चिमी तथा दक्षिणी राज्यों की तुलना में काफी कम हैं. ऐतिहासिक रूप से कोलकाता ब्रिटिश काल में भारत की आर्थिक राजधानी था, लेकिन पिछले कई दशकों में औद्योगिक पलायन, राजनीतिक अस्थिरता और निवेश की कमी के कारण यह शहर और पूरा पूर्वी क्षेत्र पिछड़ गया.

परिणामस्वरूप:

  • पूर्वी राज्यों की प्रति व्यक्ति आय पश्चिमी राज्यों से काफी कम है.
  • युवा प्रतिभाएं बेहतर अवसरों की तलाश में पश्चिम और दक्षिण की ओर पलायन कर रही हैं.
  •  क्षेत्र की प्राकृतिक संसाधनों (कोयला, खनिज, बंदरगाह) के बावजूद विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की वृद्धि सीमित रही है.

पूर्वी भारत का इंजन

सान्याल के अनुसार, पूर्वी भारत को मुख्यधारा में लाने की कुंजी कोलकाता का पुनरुद्धार है. उन्होंने कहा, “पूर्वी आधे भारत को पुनर्जीवित करने का राज कोलकाता को पुनर्जीवित करना है.” कोलकाता पहले से ही बड़ा शहरी बाजार है, इसके पास मौजूदा क्लस्टर, बंदरगाह सुविधाएं और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए गेटवे बनने की भौगोलिक स्थिति है.

यदि कोलकाता फिर से औद्योगिक, वित्तीय और व्यापारिक केंद्र बनता है, तो यह पूरे पूर्वी क्षेत्र (विशेषकर पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर) में विकास की लहर पैदा कर सकता है. सान्याल ने जोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर 7-8% की स्थिर जीडीपी वृद्धि बनाए रखने के लिए इस पूर्व-पश्चिम असमानता को कम करना जरूरी है.

अवसर और सुझाव

हालिया घटनाक्रमों, जैसे पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणामों को सान्याल ने पूर्वी भारत के पुनरुत्थान का ऐतिहासिक अवसर बताया है. उन्होंने सुझाव दिया कि:

  • कोलकाता को उच्च-वृद्धि वाले शहरी हब के रूप में विकसित किया जाए.
  • विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों (विशेषकर निर्यात-उन्मुख) में निवेश बढ़ाया जाए.
  • बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और उद्योग-अनुकूल नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाए.

कोलकाता को दक्षिण-पूर्व एशिया का गेटवे बनाकर भारत अपनी पूर्वी क्षमता को पूरी तरह से अनलॉक कर सकता है.

संजीव सान्याल का यह बयान भारत की आर्थिक नीति-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संदेश है. उत्तर-दक्षिण की बहस से आगे बढ़कर हमें पूर्व-पश्चिम खाई को पाटने पर ध्यान देना चाहिए. कोलकाता का पुनरुत्थान न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे पूर्वी भारत और राष्ट्र की समृद्धि के लिए आवश्यक है. यदि इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए, तो भारत की विकास कहानी और अधिक समावेशी और संतुलित हो सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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