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1983 में नागरिकता, 1980 में मतदाता कैसे? सोनिया गांधी के खिलाफ सेशन कोर्ट पहुंचा वोटर लिस्ट विवाद

नागरिकता मिलने से तीन साल पहले ही वोटर लिस्ट में नाम कैसे जुड़ गया? सोनिया गांधी से जुड़े इस आधी सदी पुराने रहस्य पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ऐसा क्या पूछ लिया कि उड़ गए सबके होश, जानिए इस पूरे विवाद की असलियत

Sonia Gandhi in Indian citizenship case

राऊज एवेन्यु कोर्ट कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्षा सोनिया गांधी से भारतीय नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर 4 जुलाई को सुनवाई करेगा. स्पेशल जज डॉक्टर विशाल गोगने की कोर्ट रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई कर रही है. इस मामले में याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं.

‘आधी सदी पुराना मामला, किसकी होगी जांच?’

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि आप यहां अदालत के समक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए अनुरोध करने आए हैं, जबकि यह मामला आधी सदी पुराना है. किसकी जांच की जाएगी? आप दायरा बढ़ा रहे हैं. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि आज की तारीख में एकमात्र जानकारी जो आप दे रहे हैं, वह नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थिति है.

वकीलों की जिरह और कोर्ट के सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा था कि यह एक विदेशी नागरिक द्वारा किए गए घोषणा पत्र का मामला है. हम कोर्ट को यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह केवल जाली दस्तावेज़ या धोखाधड़ी के जरिए से ही किया जा सकता था. हमने मतदाता सूची की एक प्रति के लिए आवेदन किया था और प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई गई थीं. वहीं, सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर एस चीमा ने इसका विरोध किया था.

कोर्ट ने वकील से पूछा था कि आप इस मुद्दे को कैसे सही ठहराएंगे कि वह 1980 में मतदाता सूची में थीं, जबकि 1983 में नागरिक बनीं. यह मूलभूत मुद्दा है. इस पर सोनिया गांधी के वकील ने कहा था कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि आवेदन करने से पहले वह नागरिक थीं? क्या कोई व्यक्ति आवेदन दाखिल करने से पहले नागरिक नहीं हो सकता?

याचिका का विरोध और सेशन कोर्ट में अपील

कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि आप जो मांग रहे हैं, वह चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ एक आवारा और मछली पकड़ने जैसी जांच है. सोनिया गांधी ने उनके खिलाफ याचिका दाखिल किए जाने का विरोध किया है. यह रिविजन पिटीशन वकील विकास त्रिपाठी ने दायर की है. इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 11 सितंबर को विकास त्रिपाठी की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने सेशन कोर्ट में याचिका दायर की है.

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क्या हैं सोनिया गांधी पर आरोप?

दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज करा दिया गया था. यह याचिका विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई थी. दायर याचिका में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था. जबकि आधिकारिक तौर पर वह अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिक बनीं.

याचिका में कहा गया था कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है, लेकिन 1980 में सोनिया गांधी की स्थिति अलग थी. याचिका में सवाल उठाया गया था कि नई दिल्ली लोकसभा सीट पर वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम कैसे शामिल था? हालांकि बीजेपी ने पहले आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी ने नागरिकता मिलने से पहले ही वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा लिया था.



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