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नाबालिग घरेलू सहायिका से दुर्व्यवहार के आरोप में बर्खास्त सिविल जज की बहाली को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखने का दिया आदेश

नाबालिग घरेलू सहायिका से दुर्व्यवहार के आरोप में बर्खास्त सिविल जज की बहाली को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखने का आदेश दिया है.

OBC Reservation Supreme Court

नाबालिग घरेलू सहायिका से दुर्व्यवहार के आरोप में बर्खास्त सिविल जज की बहाली को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखने का आदेश दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तब तक शुरू नही की जा सकती, जब तक कि उसे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित जजों की समिति द्वारा अधिकृत न किया गया हो.

कोर्ट ने यह भी कहा कि रजिस्ट्रार जनरल के पास ऐसी कार्रवाई खुद से शुरू करने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत प्राप्त शक्ति हाई कोर्ट को सामूहिक रूप से अनुशासनात्मक नियत्रण प्रदान करती है. जिसमें अनिवार्य रूप से मुख्य न्यायाधीश और उनके सहयोगी जज शामिल होते है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस अधिकार के बिना शुरू की गई कार्यवाही में क्षेत्राधिकार संबंधी वह दोष निहित है जो मामले की जड़ तक जाता है. इस जज को विभागीय कार्रवाई के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने आप पर घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया.

मुख्य न्यायाधीश की समिति की मंजूरी अनिवार्य- सुप्रीम कोर्ट

हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह आरोपों की मेरिट या विभागीय जांच में दर्ज निष्कर्षो की जांच नहीं कर रहा था, बल्कि मामले का फैसला इस शुरुआती मुद्दे पर कर रहा था कि क्या कार्रवाई खुद ही वैध रूप से शुरू की गई. यह मामला सिविल जज दीपाली शर्मा से जुड़ा है. उनपर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने घर पर 17 वर्षीय लड़कीं को घरेलू सहायिका के रूप में रखा और उसके साथ शारीरिक व मानसिक दुर्व्यवहार किया.

इसी शिकायत के आधार पर उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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