PM Modi Energy Security Meeting: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध के चलते दुनिया भर में ईंधन की सप्लाई चेन पूरी तरह तहस-नहस हो चुकी है. सबसे रणनीतिक और अहम माना जाने वाला ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) इस समय बंद है, जिसकी वजह से भारत में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी सिलेंडर की किल्लत को लेकर धुकधुकी चरम पर पहुंच गई है.
देश में गैस और तेल के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं. इस वैश्विक महा-संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कमान संभाल ली है. बता दें कि पांच देशों की अपनी बेहद महत्वपूर्ण विदेश यात्रा से लौटते ही पीएम मोदी ने गुरुवार को साल 2026 की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक बेहद हाई-प्रोफाइल और साढ़े चार घंटे की मैराथन बैठक बुलाई, जिसमें मंत्रियों को संकट से निपटने का महामंत्र दिया गया.
मंत्रियों को पीएम मोदी की सख्त हिदायत(PM Modi Energy Security Meeting)
साढ़े चार घंटे से अधिक समय तक चली इस आपातकालीन बैठक में प्रधानमंत्री मोदी का रुख बेहद कड़ा और स्पष्ट था. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने अपने सभी मंत्रियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि हमारी सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन अब 2026 चल रहा है;
इसलिए अब पीछे मुड़कर यह देखने का समय नहीं है कि अतीत में क्या हुआ बल्कि अब भविष्य की चुनौतियों को देखकर काम करना होगा. उन्होंने मंत्रियों को हिदायत दी कि वे किसी भी तरह के अनावश्यक विवादों में उलझने के बजाय सिर्फ और सिर्फ अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें. फाइलों को दफ्तरों में अटकाने के बजाय तुरंत आगे बढ़ाया जाए ताकि कम समय में ज्यादा और प्रभावी काम हो सके.
‘होर्मुज’ की नाकेबंदी से मंडराया खतरा(Hormuz Crisis India)
दरअसल, भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और एलपीजी के रूप में आयात करता है, और होर्मुज जलडमरूमध्य ही इस सप्लाई का मुख्य वैश्विक रास्ता है. इस मार्ग के बंद होने का मतलब है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर खतरे में है.
इसी को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने बैठक में साफ कहा कि आने वाले समय में वैश्विक हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, इसलिए भारत को ऊर्जा के मामले में तुरंत आत्मनिर्भर बनना होगा. उन्होंने मंत्रियों को पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने का टास्क सौंपते हुए खासतौर पर ‘बायोगैस’ को एलपीजी के मुख्य विकल्प के तौर पर युद्धस्तर पर बढ़ावा देने का निर्देश दिया.
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आम जनता को न हो कोई परेशानी
इस अहम महा-बैठक (PM Modi Energy Security Meeting) में प्रधानमंत्री ने सिर्फ ऊर्जा संकट पर ही बात नहीं की, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को लेकर भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह विजन केवल एक राजनीतिक नारा नहीं बल्कि देश के लिए हमारा कमिटमेंट है.
उन्होंने कृषि, विदेश, पावर, लेबर और रोड ट्रांसपोर्ट समेत कई प्रमुख मंत्रालयों के प्रेजेंटेशन देखने के बाद निर्देश दिया कि सरकार का कोई भी नया सुधार ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आम जनता को कोई परेशानी या तकलीफ हो. हर नई नीति और योजना का एकमात्र मकसद देशवासियों की जिंदगी को और ज्यादा सरल और आसान बनाना होना चाहिए.
पेंडिंग काम तुरंत खत्म करने का अल्टीमेटम
इस हाई-लेवल मीटिंग (PM Modi Energy Security Meeting) के बाद साफ हो गया है कि मोदी सरकार आने वाले दिनों में देश की ऊर्जा सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई बड़े और कड़े फैसले ले सकती है. सभी मंत्रालयों को साफ कह दिया गया है कि कोई भी काम पेंडिंग नहीं रहना चाहिए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पूरी सरलता लाई जाए.
पश्चिम एशिया के इस खौफनाक संकट को सरकार ने एक अवसर के रूप में लिया है, ताकि देश के भीतर वैकल्पिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को इतनी तेजी से खड़ा किया जा सके कि भविष्य में दुनिया के किसी भी कोने में जंग छिड़ने पर भारत की रसोई और गाड़ियों की रफ्तार पर कोई ब्रेक न लग सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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