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कोयंबटूर केस की प्रेस मीट में हंसने वाले IPS अफसरों को सीएम विजय ने किया सस्पेंड? जानें क्या है वायरल वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि कोयंबटूर रेप-मर्डर केस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंसने वाले तीन आईपीएस अधिकारियों को तमिलनाडु के सीएम विजय ने सस्पेंड कर दिया है. लेकिन इसके पीछे की सच्चाई बिलकुल ही अलग है.

Fact Check Did Tamil Nadu CM Vijay Suspend IPS Officers For Laughing in Coimbatore Press Meet

Fact Check: सोशल मीडिया एक ऐसी जगह है जहां कोई भी खबर आग की तरह फैलती है, और अगर उस खबर में थोड़ा सा फिल्मी तड़का या राजनीति का मसाला हो, तो लोग बिना सोचे-समझे उसे सच मान लेते हैं. पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय और राज्य पुलिस से जुड़ा एक ऐसा ही दावा धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है. दावा ये है कि कोयंबटूर में एक 10 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए खौफनाक रेप और मर्डर केस की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी.

इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर ब्रीफिंग के दौरान वहां मौजूद तीन बड़े पुलिस अधिकारी कैमरे पर हंसते हुए दिखाई दिए. इसके बाद दावा किया गया कि तमिलनाडु के नए नवेले मुख्यमंत्री विजय ने ‘नायक’ फिल्म के अनिल कपूर की तरह ऑन-द-स्पॉट फैसला लेते हुए उन तीनों पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया. सोशल मीडिया पर लोग सीएम विजय की तारीफों के पुल बांध रहे हैं और कह रहे हैं कि ‘इसे कहते हैं असली शिक्षा और त्वरित एक्शन.’

लेकिन क्या वाकई ऐसा कुछ हुआ है? जब इस सनसनीखेज दावे की पड़ताल की गई, तो कहानी कुछ और ही निकली. आइए आपको बताते हैं कि इस पूरे वायरल वीडियो और सस्पेंशन के दावे के पीछे का असली सच क्या है.

क्या है हो रहा वायरल?

एक यूजर ने एक्स पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, ‘मात्र 10 दिन पहले बना एक CM फैसले लेने में नायक के अनिल कपूर को भी पछाड़ रहा है. 5 दिन पहले Coimbatore में एक दस साल की बच्ची का रेप और फिर मर्डर हुआ था.

घटना की ब्रीफिंग के लिए रखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन आईपीएस अफसरों को सबने हंसते देखा. सबको बुरा लगा. पर विजय ने इस मामले में तमाशाबीन ना बनकर अपना फर्ज निभाते हुए तीनों आईपीएस अफसर को ससपेंड किया है…’ इस पोस्ट में आगे महिला आईजी और दो डीआईजी का जिक्र करते हुए राजनीतिक तंज भी कसे गए. लोग इस दावे को सच मानकर लगातार फॉरवर्ड कर रहे थे.

क्या वाकई अफसर सस्पेंड हुए?

पड़ताल में सामने आया कि तमिलनाडु सरकार या पुलिस विभाग की तरफ से ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है. अगर किसी राज्य में एक महिला आईजी (IG) और दो एसपी-डीआईजी स्तर के बड़े अधिकारियों को सस्पेंड किया जाता, तो यह देश भर के मुख्य समाचारों की हेडलाइन होती. लेकिन किसी भी प्रामाणिक न्यूज सोर्स पर ऐसी कोई खबर मौजूद नहीं है. तमिलनाडु पुलिस के मीडिया रिलेशंस ऑफिसर साफ तौर पर इस खबर को पूरी तरह से अफवाह और गलत बताया है. तमिलनाडु के प्रमुख न्यूज चैनल ने भी इस निलंबन की खबर का खंडन किया है.

वीडियो में क्यों हंस रहे थे पुलिस अधिकारी?

दरअसल, ये वाकया प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से ठीक पहले का है. जानाकरी के मुताबिक, ये प्रेस कॉन्फ्रेंस 23 मई को दोपहर 3:30 बजे होनी थी. तमिलनाडु वेस्ट जोन की आईजी राम्या भारती, कोयंबटूर के एसपी पवन कुमार और डीआईजी स्वामीनाथन कॉन्फ्रेंस रूम में समय से पहले आ गए थे. चूंकि कुछ सीनियर अधिकारियों के साथ मामले की आखिरी चर्चा बाकी थी, इसलिए आईजी राम्या भारती ने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा कि आप लोग कृपया थोड़ी देर के लिए कमरे के बाहर इंतजार करें.

ज्यादातर पत्रकार बाहर चले गए, लेकिन कुछ कैमरामैन अंदर ही अपनी पोजीशन सेट कर रहे थे. इसी बीच कुछ टीवी चैनलों की लाइव फीड और कैमरे चालू रह गए.

उसी समय वहां मौजूद एक स्थानीय न्यूज चैनल के कैमरामैन ने आईजी से मजाक में तमिल भाषा में कहा, ‘मैम, प्रेस मीट शुरू होने से पहले प्लीज अपना मोबाइल फोन ऑफ कर दीजिएगा.’ कैमरामैन ने ‘मोबाइल’ शब्द के लिए जो ठेठ तमिल शब्द इस्तेमाल किया, उसे आईजी तुरंत समझ नहीं पाईं. इसी भाषा के फेर और हल्के-फुल्के मजाक पर वहां मौजूद आईजी और बाकी अधिकारी हंस पड़े. इसके ठीक बाद दोपहर 3:40 पर जब आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई, तो सभी अधिकारी पूरी तरह से गंभीर थे और उन्होंने पूरी संवेदनशीलता के साथ केस की जानकारी साझा की.

मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुई इस दुखद घटना को लेकर पुलिस बेहद सख्त है. 10 साल की बच्ची के साथ हुए इस जघन्य अपराध के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उन पर कड़ा ‘गुंडा एक्ट’ लगाया गया है. मुख्यमंत्री विजय ने भी इस मामले को लेकर पुलिस विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में तुरंत केस दर्ज हो और अपराधियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त से सख्त सजा दिलवाई जाए.

इस जांच से साफ है कि सोशल मीडिया पर अधूरा वीडियो क्लिप दिखाकर लोगों की भावनाओं को भड़काया गया. पुलिस वाले किसी दुखद घटना या पीड़िता पर नहीं, बल्कि प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले एक कैमरामैन के तमिल भाषा में किए गए हल्के मजाक पर हंसे थे. न तो मुख्यमंत्री विजय ने किसी अधिकारी को सस्पेंड किया है और न ही पुलिस ने असंवेदनशीलता दिखाई है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा पूरी तरह से भ्रामक और मनगढ़ंत है.

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-भारत एक्सप्रेस



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