सुप्रीम कोर्ट को और पांच नए जज मिल गए हैं. केंद्र सरकार ने पांच नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट के जज बनेंगे. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है. इससे पहले हाल ही में एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की अधिकतम संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी.
कॉलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मुहर
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 और 27 मई 2026 को हुई बैठकों में सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों को नियुक्त करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिन्हें अब राष्ट्रपति ने मंजूर कर लिया है. केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसकी जानकारी खुद साझा की है. कॉलेजियम में भारत के सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस जे. के. महेश्वरी, जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस एम. एम. सुंदरेश शामिल थे.
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जानिए सुप्रीम कोर्ट के नए जजों के बारे में
जस्टिस शील नागू: वर्ष 1987 में वकालत शुरू की थी. उन्होंने जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में मुख्य रूप से दीवानी और संवैधानिक मामलों की पैरवी की, उसके बाद 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. मई 2013 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया. मई 2024 में उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया. 12 साल से अधिक के कार्यकाल में उन्होंने 499 फैसले सुनाए हैं. वह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हुए हैं.
जस्टिस श्री चंद्रशेखर: रांची में जन्मे जस्टिस चंद्रशेखर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की और 1993 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया. उन्होंने लगभग 19 वर्षों तक दीवानी और आपराधिक मामलों में सक्रिय वकालत की. वर्ष 2013 में उन्हें झारखंड हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. जून 2014 में उनकी स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि हुई. दिसंबर 2023 में उन्हें कुछ समय के लिए झारखंड हाई कोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था.
जस्टिस संजीव सचदेवा: 1988 में दिल्ली बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया और जिला अदालतों से लेकर दिल्ली हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों में पैरवी की. जुलाई 2011 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया. 2013 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. वह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट में जज बने हैं.
जस्टिस अरुण पल्ली: वह ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी चार पीढ़ियां कानूनी पेशे से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने 1988 से पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट से वकालत शुरू की. सितंबर 2004 से मार्च 2007 तक उन्होंने पंजाब सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता के तौर पर पक्ष रखा. अप्रैल 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला.
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वी. सुब्रमणि मोहना: वह उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने वकालत से सीधे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने तक का सफर तय किया है. वह ऐसे परिवार में जन्मीं, जिसका कानून के पेशे से कोई संबंध नहीं था. वर्ष 1983 में जब भारत में पहली बार पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम शुरू हुआ, तब उन्होंने कोयंबटूर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के पहले बैच में दाखिला लिया था.
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