सीएपीएफ ने आठ साल में 6.40 करोड़ पेड़ लगाए : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) ने जंगलों की सुरक्षा और भारत के पर्यावरण को मजबूत करने की कोशिशों के तहत पिछले आठ वर्षों में पूरे देश में 6.40 करोड़ पेड़ लगाए हैं. केंद्रीय गृह मंत्री ने पश्चिम त्रिपुरा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर बीएसएफ जवानों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि इस साल कम संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे क्योंकि उन पौधों को बदलने पर भी ध्यान दिया जाएगा जो पहले लगाए गए थे, लेकिन बच नहीं पाए.
उन्होंने कहा, “2019 से सीएपीएफ ने मिलकर पूरे देश में विभिन्न प्रजातियों के 6.40 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं. इस साल, लगभग 40 लाख से 60 लाख पेड़ लगाए जाएंगे और उन क्षेत्रों में फिर से पेड़ लगाए जाएंगे, जहां पहले लगाए गए पेड़ बच नहीं पाए थे.”
आगामी वर्ष के लिए योजना और जलवायु परिवर्तन की चुनौती
शाह ने कहा कि सीएपीएफ अगले साल दो करोड़ पेड़ लगाने की योजना बना रही है, जो जंगल के दायरे को बढ़ाने और पर्यावरण की रक्षा के लिए जारी राष्ट्रव्यापी प्रयास का हिस्सा है. तेजी से हो रहे शहरीकरण और विकास कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के कारण तापमान बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन हो रहा है, जिससे कृषि और मानव जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है और ओजोन परत को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने कहा, “बदलते पर्यावरणीय हालात का सामना करने का एकमात्र समाधान जंगल के दायरे को बढ़ाना, मौजूदा जंगलों की रक्षा करना और पर्यावरण के अनुकूल उपाय अपनाना है.”
विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण और जन-आह्वान
विश्व पर्यावरण दिवस पर शाह ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ बांग्लादेश सीमा पर लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए. उन्होंने सभी संबंधित लोगों से आने वाली पीढ़ियों के लाभ के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने का आग्रह किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण पर जोर दिया है. शाह ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का सक्रिय रूप से पालन कर रहा है और सतत विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता पर जोर दिया.
पेरिस सम्मेलन में भारत के मॉडल को मिली सराहना
उन्होंने कहा कि लोगों को पर्यावरण की देखभाल वैसे ही करनी चाहिए जैसे वे अपने बच्चों और प्रियजनों की करते हैं. जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सभी के कल्याण के लिए जरूरी है. गृह मंत्री ने चेतावनी दी, “अगर हमने आज ही कदम नहीं उठाए और नुकसान की भरपाई के लिए काम नहीं किया, तो धरती का बढ़ता तापमान, जलवायु परिवर्तन और ओजोन परत में बड़े छेद इस ग्रह को रहने लायक नहीं छोड़ेंगे.”
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उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने, पर्यावरण के अनुकूल बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने और ऊर्जा की खपत कम करने के लिए कई समन्वित उपाय शुरू किए हैं. एक तरह से, पेरिस सम्मेलन में भारत के मॉडल को जलवायु कार्रवाई के लिए एक आदर्श ढांचे के तौर पर मान्यता दी गई थी.
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