दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनावों में दोबारा मतदान कराने की मांग को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं खारिज कर दिया है. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद पिछले दिनों फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर कुछ आवश्यक निर्देश जारी किए हैं, लेकिन फिलहाल पुनर्मतदान का आदेश देने की जरूरत नहीं है.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में दिए गए निर्देशों और निष्कर्षों वाला विस्तृत फैसला जल्द अपलोड किया जाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील राजीव खोसला, शोभा गुप्ता, रमन गांधी, अनुष्का अरोड़ा, डॉक्टर ललित भसीन, वैभव जैन, नीना गुप्ता और रुद्र विक्रम सिंह ने अपनी-अपनी दलीलों को रखा. जबकि प्रतिवादियों की ओर से वकील टी सिंहदेव, प्रिया हिंगोरानी, सुनील मित्तल और पेयोश कालरा ने दलीलें रखी थी.
मामले की सुनवाई के दौरान मतगरणना प्रक्रिया की वीडियों रिकॉर्डिंग की भी जांच की गई. 18 मई को सुनवाई कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच को मामले को सौंपा था. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की काउंटिंग पर रोक लगा दिया था. साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट को दायर याचिकाओं पर दैनिक आधार पर सुनवाई करने का निर्देश दिया था.
यह याचिका बीरेंद्र सांगवान सहित अन्य की ओर से दायर किया गया था. कोर्ट ने कहा था कानूनी पक्षकारों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए मतपत्र आदि जैसे मूल रिकॉर्ड को मंगवाना आवश्यक हो सकता है, इसलिए मामले को हाई कोर्ट के खंडपीठ को सौंपना उचित होगा.
फैसला आने तक मतपत्रों की गिनती स्थगित रखने का निर्देश
कोर्ट ने आदेश दिया था कि हम इन याचिकाओं को दिल्ली हाई कोर्ट को हस्तांतरित करते हैं और मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं और मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वह इस सप्ताह के भीतर इन्हें एक विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें. कोर्ट ने कहा था कि जब तक हाई कोर्ट फैसला नही सुनाता, तब तक मतपत्रों की गिनती स्थगित रखी जाएगी.
इससे पहले राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हिमा कोहकी की अध्यक्षता में दो चुनाव न्यायाधिकरण गठित करने का आदेश दिया है. यह आदेश विभिन्न राज्यों में बार चुनावों के संचालन से संबंधित मुकदमों में हुई वृद्धि से निपटने के लिए पारित किया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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