22 जून 1986. मेक्सिको के एस्टाडियो अज्टेका में फुटबॉल की दुनिया हमेशा के लिए बदल गई. क्वार्टर फाइनल मुकाबला- अर्जेंटीना बनाम इंग्लैंड. मैच का 51वां मिनट. डिएगो आर्मांडो मराडोना ने अपने हाथ से गेंद को गोल में धकेल दिया और इतिहास रच दिया.
‘हैंड ऑफ गॉड’: एक विवादित लेकिन अविस्मरणीय पल
मराडोना ने बाद में कहा था, ‘मैंने थोड़ा सा सिर और थोड़ा सा भगवान का हाथ लगाया.’ इंग्लैंड के गोलकीपर पीटर शिल्टन और डिफेंडर भी हैरान रह गए. रेफरी ने गोल मान लिया. स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शक और पूरी दुनिया हैरान थी. कुछ देर बाद ही उसी मैच में मराडोना ने दूसरा गोल किया- वह गोल आज भी फुटबॉल का सबसे बेहतरीन गोल माना जाता है. उन्होंने अपनी टीम को अकेले लगभग आधा मैदान पार करके गोल किया. अर्जेंटीना 2-1 से जीता और सेमीफाइनल में पहुंचा. अंत में वे चैंपियन बने.
ये घटना सिर्फ एक गोल नहीं थी. यह 1982 के फॉकलैंड युद्ध (माल्विनास युद्ध) के बाद इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच गहरी दुश्मनी का प्रतीक भी बन गई. मराडोना ने इसे ‘कुछ हद तक बदला’ कहा.
फुटबॉल विश्वकप 2026 के बीच ये याद क्यों?
आजकल फुटबॉल विश्वकप का रोमांच पूरे जोरों पर है. हर मैच में नई कहानियां, नई विवाद और नई प्रतिभाएं उभर रही हैं. लेकिन मराडोना का यह पल हमें याद दिलाता है कि फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं- यह भावनाओं, राष्ट्रवाद, विवाद और जीनियस का मिश्रण है.
मराडोना का करियर
- 1986 विश्वकप में वे ‘गॉड’ बनकर उभरे.
- 1990 में फिर फाइनल तक टीम को पहुंचाया.
- उनके खेल में जादू, चालाकी, गुस्सा और प्रतिभा का अद्भुत संगम था.
- 2020 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी हर विश्वकप में जीवित है.
आज के खिलाड़ियों के लिए सीख
आज के सुपरस्टार्स (मेस्सी, रोनाल्डो, एम्बाप्पे आदि) के दौर में VAR, हाई-टेक कैमरे और सख्त नियम हैं. लेकिन मराडोना का युग था, जब एक खिलाड़ी अपने जादू से पूरा मैच पलट सकता था. ‘हैंड ऑफ गॉड’ हमें याद दिलाता है कि फुटबॉल में कभी-कभी नियमों से ज्यादा दिल और दिमाग का खेल चलता है.
22 जून की ये तारीख फुटबॉल प्रेमियों के लिए हमेशा खास रहेगी. मराडोना ने दिखाया कि फुटबॉल में हीरो और विलेन अक्सर एक ही व्यक्ति होते हैं. उनका गोल विवादित था, लेकिन उनका जादू अविवादित था.
जब भी कोई खिलाड़ी मैदान पर असंभव लगने वाला काम करता है, हम सब अनायास याद कर लेते हैं- ‘ये मराडोना जैसा है.’
‘भगवान का हाथ’ आज भी फुटबॉल की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है.
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-भारत एक्सप्रेस
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