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India Temple Treasure Controversies: भारत में मंदिरों का इतिहास जितना अगाध आस्था से जुड़ा है, उतना ही उनके अभेद्य खजाने, वैभव और सदियों पुराने सोने-चांदी के लिए भी जाना जाता है. हाल ही में अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान के पैसों की चोरी का जो सनसनीखेज मामला सामने आया है, उसने पूरे देश के श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है. लोग हैरान हैं कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से जहां हर महीने करोड़ों का चढ़ावा आ रहा है, वहां कड़े सुरक्षा घेरे और प्रशासनिक निगरानी के बीच भी दान राशि में अंदरूनी हेरफेर हो गई.
पुलिस और ट्रस्ट इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं कि आखिर सुरक्षा की इतनी परतों के बावजूद दान के पैसों पर हाथ साफ करने वाला वो इनसाइडर कौन है. लेकिन इतिहास गवाह है कि मंदिरों के खजाने में सेंधमारी या प्रबंधन में घोटाले का यह कोई पहला मामला नहीं है. राम मंदिर से लेकर वैष्णो देवी, तिरुपति बालाजी और पुरी के जगन्नाथ मंदिर तक, समय-समय पर ऐसे चौंकाने वाले विवाद सामने आए हैं जब भगवान की तिजोरी से करोड़ों की दौलत गायब पाई गई.
माता वैष्णो देवी मंदिर में नकली मुद्रा का घोटाला
जम्मू के त्रिकुटा पर्वतों पर स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को देश के सबसे कड़े और पारदर्शी प्रबंधन वाले बोर्ड्स में से एक माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद यहां के सोने के चढ़ावे और दान के पैसों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आ चुका है. आरटीआई और आंतरिक ऑडिट की एक लीक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा माता के दरबार में श्रद्धा से चढ़ाए गए कई सोने-चांदी के छत्र और आभूषण असल में जांच के दौरान नकली या बेहद कम कैरेट के पाए गए. इस खुलासे ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था क्योंकि यह सीधे तौर पर इनसाइडर लॉबी की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा था.
सिर्फ आभूषण ही नहीं, बल्कि माता की गुफा से निकलने वाले करोड़ों रुपये के कैश और सिक्कों की गिनती के दौरान भी अंदरूनी कर्मचारियों द्वारा बड़ी हेरफेर की शिकायतें आईं. इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद श्राइन बोर्ड को अपनी पूरी काउंटिंग व्यवस्था को बदलना पड़ा और इसे पूरी तरह से डिजिटल और सीसीटीवी कैमरों की कड़क निगरानी में शिफ्ट करना पड़ा ताकि भगवान के घर में होने वाली इस डकैती को रोका जा सके.
पद्मनाभस्वामी मंदिर में 266 किलो सोना गायब
केरल का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर आधुनिक भारत के इतिहास के सबसे बड़े और चौंकाने वाले मंदिर ऑडिट विवाद का केंद्र रहा है. इस रहस्यमयी खजाने की कहानी जुलाई 2011 में शुरू हुई जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एक उच्च-स्तरीय कमेटी ने मंदिर के सदियों पुराने गुप्त तहखानों को खोला. जब पांच तहखाने खुले तो वहां 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का प्राचीन सोना, बेशकीमती हीरे और दुर्लभ सिक्के मिले, जिसके बाद मंदिर को एक अभेद्य किले में बदल दिया गया. लेकिन असली धमाका अप्रैल 2014 में हुआ, जब कोर्ट द्वारा नियुक्त अमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी.

उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर के प्रबंधन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हैं और खजाने से सोने के कई प्राचीन बर्तन गायब हो चुके हैं. इसके बाद देश के पूर्व मुख्य लेखा परीक्षक यानी कैग विनोद राय से विशेष ऑडिट कराया गया. फरवरी 2015 में जब विनोद राय की अंतिम ऑडिट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई तो पूरा देश सन्न रह गया. रिपोर्ट ने खुलासा किया कि साल 1990 से 2001 के बीच खजाने से कुल 82 बार सोना बाहर निकाला गया था.
वहीं मंदिर की मरम्मत और शुद्धिकरण के नाम पर कुल 893 किलो सोना ठेकेदार को सौंपा गया, लेकिन रिकॉर्ड में वापस सिर्फ 627 किलो सोना ही आया. सीधे शब्दों में कहें तो 266 किलो प्राचीन सोना और करीब 5 करोड़ रुपये की सोने की छड़ें मंदिर के खजाने से हमेशा के लिए गायब हो चुकी थीं, जिसका आज तक कोई सुराग नहीं मिला.
जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की खोई हुई चाबियों का सस्पेंस
ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार हमेशा से रहस्य का विषय रहा है, लेकिन यह डकैती से ज्यादा सरकारी लापरवाही और प्रशासनिक साजिश का शिकार बना. इस खजाने का आखिरी बार पूरा आधिकारिक ऑडिट साल 1978 में हुआ था, तब इसमें टन के हिसाब से सोने-चांदी के आभूषण दर्ज किए गए थे और इसके बाद भीतरी कक्ष को सील कर दिया गया था. विवाद तब भड़का जब 4 अप्रैल 2018 को उड़ीसा हाई कोर्ट के आदेश पर एएसआई की टीम खजाने के स्ट्रक्चरल सेफ्टी की जांच करने पहुंची. जब भीतरी कक्ष का ताला खोलने के लिए चाबियां मांगी गईं, तो जिला ट्रेजरी और मंदिर प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए कि भीतर भंडार की मूल चाबियां गायब हो चुकी हैं.

इस खबर के फैलते ही पूरे देश के जगन्नाथ भक्तों में भारी आक्रोश फैल गया और यह उड़ीसा की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया. चौतरफा घिरने के बाद प्रशासन ने अचानक दावा किया कि रिकॉर्ड रूम में एक सीलबंद लिफाफे में डुप्लिकेट चाबियां मिल गई हैं, जिस पर 1985 का टैग था. यह विवाद सालों तक खिंचता रहा और अंततः 12 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद, मार्च-अप्रैल 2026 में भीतरी खजाने के संदिग्ध तालों को काटकर खोला गया. करीब 48 साल बाद अब नए सिरे से भगवान के आभूषणों की गिनती शुरू की गई है ताकि सच सामने आ सके.
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तिरुपति की तिजोरी से उड़ा लिया गया कीमती मुकुट
दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की सुरक्षा व्यवस्था को भेदना नामुमकिन माना जाता है, लेकिन यहां भी प्रशासनिक तिजोरी के अंदरूनी हेरफेर का एक बेहद गंभीर मामला सामने आ चुका है. अक्टूबर 2017 में जब एक कस्टोडियन ऑफिसर का ट्रांसफर हो रहा था, तब रूटीन वेरिफिकेशन के दौरान तिजोरी से कुछ कीमती सोने-चांदी के सामान कम पाए गए. तत्कालीन असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के कार्यकाल का जब ऑडिट हुआ, तो पता चला कि भगवान के आभूषण गायब हैं. प्रशासन ने इस मामले को दबाने की कोशिश की और चुपचाप कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी की सैलरी से हर महीने 25 हजार रुपये काटकर रिकवरी के आदेश दे दिए.
लेकिन अगस्त 2019 में यह मामला तब मीडिया में लीक हो गया जब मंदिर के ही कुछ कर्मचारियों ने विरोध किया कि इतने बड़े आपराधिक मामले में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई. इसके बाद टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह मानना पड़ा कि 5.4 किलो वजन का एक चांदी का मुकुट, दो सोने के हार और दो सोने की अंगूठियां तिजोरी से सच में गायब हैं. जनवरी 2020 में चार महीने के कड़े री-वेरिफिकेशन के बाद आई फाइनल रिपोर्ट में पुष्टि कर दी गई कि वो मुकुट और गहने कभी नहीं मिले और उन्हें आधिकारिक तौर पर हमेशा के लिए खोया हुआ मान लिया गया.
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