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वोटर बनने की प्रक्रिया हुई मुश्किल, फॉर्म 6 में जुड़ा नया सेक्शन

Voter List Change: निर्वाचन आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में नया सेक्शन जोड़ा है. अब नए वोटर्स को अपने या माता-पिता की पिछली SIR स्थिति बतानी होगी.

Voter List Change: देश में वोटर बनने की प्रक्रिया में अहम बदलाव होने वाला है. निर्वाचन आयोग ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन फॉर्म 6 में एक अतिरिक्त सेक्शन जोड़ दिया है. इस नए हिस्से में आवेदकों को अपने या माता-पिता की स्थिति पिछली विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के दौरान बतानी होगी.

कानूनी संशोधन अभी बाकी

दिलचस्प बात यह है कि आयोग ने अब तक इस बदलाव को लेकर कोई कानूनी अधिसूचना जारी नहीं की है. पिछले साल से शुरू हुए SIR अभियान में 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरा हो चुका है. इसी प्रक्रिया में 5.58 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए, जिससे अब नए रजिस्ट्रेशन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

पश्चिम बंगाल में बड़ा असर

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वहां 27 लाख से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. नतीजतन, कई लोग विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाए. इन मामलों पर अपीलें अभी भी ट्रिब्यूनल में लंबित हैं.

ऑनलाइन और ऑफलाइन फॉर्म में अंतर

ECINET पोर्टल पर अपलोड किए गए ऑनलाइन फॉर्म 6 में नया डिक्लेरेशन सेक्शन जोड़ा गया है. यह हिस्सा पार्ट J और K के बीच रखा गया है. ऑफलाइन फॉर्म में यह बदलाव नहीं किया गया है. यानी जो लोग कागजी फॉर्म भरेंगे उन्हें यह जानकारी नहीं देनी होगी.

किन राज्यों में लागू है?

यह नया सेक्शन उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिख रहा है जहां 2025-26 में SIR पूरा हो चुका है या जारी है. बिहार इसमें अपवाद है क्योंकि वहां SIR सबसे पहले जून 2025 में पूरा किया गया था. वहीं असम में कानूनी कारणों से SIR नहीं किया गया.

बिना भरे सबमिट नहीं होगा फॉर्म

तकनीकी रूप से यह कॉलम अनिवार्य नहीं है लेकिन इसे भरे बिना ऑनलाइन फॉर्म सबमिट नहीं किया जा सकता. आवेदकों को तीन विकल्प दिए गए हैं-

  1. मेरा नाम पिछली SIR की सूची में था.
  2. मेरे माता-पिता का नाम पिछली SIR की सूची में था.
  3. न तो मेरा और न ही माता-पिता का नाम पिछली SIR की सूची में था.

पहले दो विकल्प चुनने वालों को विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और सीरियल नंबर देना होगा. जिनके पास यह जानकारी नहीं है उन्हें तीसरा विकल्प चुनना पड़ेगा. आयोग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि तीसरा विकल्प चुनने वालों के आवेदन का क्या होगा.

कानूनी स्थिति और नियम

निर्वाचन आयोग ने पहले मौजूदा मतदाताओं से यह जानकारी मांगी थी लेकिन नए मतदाताओं के लिए बने फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया. RP Act, 1950 की धारा 28 के अनुसार केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर नियम बना सकती है. वहीं संविधान का अनुच्छेद 326 हर वयस्क नागरिक को वोटर बनने का अधिकार देता है.

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फॉर्म 6 का मूल उद्देश्य

फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं, 18 वर्ष पूरे करने वालों, नागरिकता हासिल करने वालों और जिनका नाम हट गया है उनके लिए होता है. पहले इसमें सिर्फ परिवार के सदस्यों के नाम और EPIC नंबर देना होता था. अब नए सेक्शन के कारण प्रक्रिया जटिल हो सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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