Ghaziabad Pink Booth Case: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस की एक ऐसी खौफनाक और रूह कंपा देने वाली संवेदनहीनता सामने आई है, जिसने पूरे सूबे की कानून व्यवस्था और खाकी के मानवीय चेहरे को सरेआम शर्मसार कर दिया है. गाजियाबाद के थाना मधुबन बापूधाम क्षेत्र में मदद की आस लेकर पुलिस के सुरक्षा घेरे यानी पिंक बूथ पर पहुंचे एक 22 साल के युवक को पुलिस की घोर लापरवाही के कारण अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.
आरोप है कि ऑटो चालक से हुए विवाद के बाद डरा-सहमा युवक जब सुरक्षा की गुहार लगाने पिंक बूथ के भीतर गया, तो वहां मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने इंसानियत को ताक पर रखकर दफ्तर का दरवाजा तक नहीं खोला. इसी घबराहट और बेबसी में हुए एक हादसे के बाद युवक तड़पता रहा, सड़क पर खून बहता रहा, लेकिन समय पर इलाज न मिलने से उसकी सांसें हमेशा के लिए थम गईं.
ऑटो चालक से किराए को लेकर हुआ था विवाद(Ghaziabad Pink Booth Case)
दिल को झकझोर देने वाली यह दर्दनाक घटना गाजियाबाद के संजयनगर 181 सेक्टर-23 स्थित पिंक बूथ की है. मूल रूप से बिहार के सीवान जिले का रहने वाला 22 वर्षीय राजकुमार रविवार के दिन किसी काम से निकला था. रास्ते में उसका एक ऑटो चालक से किराए के मामूली पैसे को लेकर विवाद हो गया. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि ऑटो चालक और उसके साथियों ने राजकुमार के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी.
राजकुमार के भाई अजय ने रोते हुए बताया कि जब विवाद हद से ज्यादा बढ़ गया और राजकुमार को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ, तो वह अपनी रक्षा के लिए पास में ही बने संजयनगर पिंक बूथ की तरफ भागा ताकि पुलिस की मदद से उसकी जान बच सके, लेकिन उसे क्या पता था कि जहां वह सुरक्षा की उम्मीद में जा रहा है, वही जगह उसकी मौत का कुआं साबित होगी.
40 मिनट तक चिल्लाता रहा फरियादी
मृतक के परिजनों और चश्मदीदों का आरोप (Ghaziabad Pink Booth Case) है कि जब राजकुमार लहूलुहान और घबराया हुआ पिंक बूथ पर पहुंचा, तो वहां का मुख्य लोहे का गेट पूरी तरह बंद था. जब लोहे का गेट नहीं खुला, तो राजकुमार किसी तरह दूसरे गुप्त रास्ते से परिसर के भीतर घुस गया और सीधे बूथ इंचार्ज के दफ्तर के बाहर पहुंच गया. वह बाहर खड़े होकर लगातार चिल्लाता रहा, रोता रहा और भीतर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों से दरवाजा खोलने की भीख मांगता रहा.
वहीं राजकुमार करीब 40 मिनट तक लगातार गुहार लगाता रहा, लेकिन दफ्तर के अंदर आराम से बैठी महिला कांस्टेबलों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. उन्होंने आवाज सुनने और बाहर खड़े फरियादी को देखने के बावजूद केबिन का शीशे वाला दरवाजा अंदर से लॉक रखा और उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया.
नसें कटने के बाद सड़क पर तड़पता रहा बिहार का लाल
बाहर खड़े हमलावरों के खौफ और अंदर पुलिस की इस खामोशी ने राजकुमार को अंदर से पूरी तरह डरा दिया. घबराहट और बेहद गुस्से में आकर उसने भीतर बैठी पुलिसकर्मियों का ध्यान खींचने के लिए दफ्तर के शीशे वाले दरवाजे पर जोर से अपने दोनों हाथ मार दिए. हाथ मारते ही दरवाजे का भारी शीशा भरभरा कर टूट गया और कांच के बड़े-बड़े टुकड़े राजकुमार के दोनों हाथों में गहराई तक धंस गए.
दरअसल कांच घुसने के कारण उसके हाथ की मुख्य नसें पूरी तरह कट गईं और फव्वारे की तरह तेजी से खून बहने लगा. नसें कटने के बाद राजकुमार दर्द से कराहते हुए वहीं सड़क पर गिर पड़ा और तड़पने लगा. इस भयानक मंजर के बाद भी पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई.
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काफी देर बाद पहुंची एंबुलेंस
वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राजकुमार काफी देर तक सड़क पर खून से लथपथ हालत में पड़ा तड़पता रहा और तमाशाबीन बनी पुलिस तमाशा देखती रही. आरोप है कि अगर पुलिस तुरंत अपनी गाड़ी से या किसी निजी वाहन से उसे अस्पताल ले जाती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी. घटना के काफी देर बाद जब सरकारी एंबुलेंस मौके पर पहुंची, तब तक राजकुमार के शरीर का अधिकांश खून बह चुका था और उसकी हालत पूरी तरह नाजुक हो चुकी थी.
जिसके बाद आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने नब्ज टटोलते ही राजकुमार को मृत घोषित कर दिया. इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और लोग न्याय की मांग करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि क्या महिलाओं की सुरक्षा के लिए करोड़ों की लागत से बने इस पिंक बूथ पर किसी पुरुष ने मदद मांगकर सबसे बड़ी गलती कर दी थी?
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-भारत एक्सप्रेस
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