इथेनॉल पॉलिसी के आने के बाद से सोशल मीडिया पर इसके इस्तेमाल को लेकर एक अलग ही बहस छिड़ी हुई है. कोई इसके यूज से माइलेज के कम होने का दावा कर रहा है तो कोई इंजन के खराब होने का. वहीं, इसको लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भी खूब ट्रोल किया गया. लेकिन अब इथेनॉल पर कुछ भी बोलने पर आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. ऐसे में जानें क्या कहता है कानून और क्या है कानूनी नियम?
किसके खिलाफ हुआ FIR?
दरअसल, हाल ही में नागपुर की साइबर पुलिस ने कई यूट्यूबर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिसमें मनीष कश्यप समेत चार कंटेंट क्रिएटर्स का नाम है. इन पर आरोप लगाया गया है कि इन्होंने इथेनॉल पॉलिसी पर मिसलीडिंग और भ्रामक जानकारियां फैलाकर केंद्रिय मंत्री नितिन गडकरी को निशाना बनाया है.
क्या सरकार की नीति का विरोध करना अपराध है?
सुप्रीम कोर्ट के वकील ध्रुव गुप्ता के मुताबिक, देश के किसी मंत्री से सवाल करना या सरकारी पॉलिसी की आलोचना करना अपने आप में कोई क्रिमिनल ऑफेंस नहीं है. संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) के तहत हर नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करने का अधिकार है. लेकिन इस आजादी की एक सीमा है. संविधान का आर्टिकल 19(2) देश की सुरक्षा, पब्लिक ऑर्डर और किसी की मानहानि जैसे मामलों में इस आजादी पर कानूनी रोक लगाने की इजाजत भी देता है.
कब हो सकती है FIR?
जानकारों के अनुसार, अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि आप सोशल मीडिया पर बैठकर साफ तौर पर झूठी, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बातें फैलाने लगें.
यदि आपकी कही गई बात किसी कानून का उल्लंघन करती है तो आपके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है. नागपुर पुलिस की यह एफआईआर भी जांच की शुरुआत है, इसे सीधे तौर पर दोषी होना नहीं माना जा सकता.
नितिन गडकरी ने दी चेतावनी
दरअसल, सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनके बेटे निखिल गडकरी की कंपनी को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे. इस पर खुद नितिन गडकरी ने साफ किया है कि उनके बेटे की कंपनी के मुनाफे को लेकर फैलाए जा रहे आंकड़े पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी ऐसी मनगढ़ंत बातें दोबारा सोशल मीडिया पर पोस्ट करेगा, तो वे उसके खिलाफ सीधे मानहानि का केस दर्ज कराएंगे.
क्रिएटर्स के लिए काम की सलाह
अगर आप भी सोशल मीडिया पर लिखते या वीडियो बनाते हैं, तो हमेशा ध्यान रखें कि नीतियों की आलोचना तथ्यों के आधार पर ही करें. किसी के व्यक्तिगत जीवन पर झूठे आरोप लगाना या बिना पुष्टि किए भ्रामक आंकड़े शेयर करना आपको सीधे कानूनी चक्रव्यूह में फंसा सकता है. सच बोलना आपका अधिकार है, लेकिन तथ्यों से समझौता करना आपकी बड़ी भूल साबित हो सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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