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UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश साल 2024 के चुनावी झटके से बड़ा सबक लेते हुए बीजेपी ने यूपी फतह करने के लिए ‘मिशन 2027’ का बेहद कड़ा और नया ब्लूप्रिंट तैयार किया है. इस बार कमान खुद गृहमंत्री अमित शाह ने संभाली है. और उनका है कि टिकट पुराने रसूख, बड़े नाम या सिफारिश पर नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ ‘जीत की गारंटी’ पर ही मिलेगा.
चार कैटेगरी में बंटीं यूपी की सीटें
अमित शाह की नई रणनीति के तहत राज्य की सभी सीटों को उनकी संवेदनशीलता और चुनावी इतिहास के आधार पर चार अलग-अलग कैटेगरी में बांट दिया गया है:
कैटेगरी A: ये बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटें हैं, जहां पार्टी पिछले तीन चुनावों से लगातार जीत दर्ज कर रही है.
कैटेगरी B: वे सीटें जहाँ पार्टी पिछली बार बेहद मामूली अंतर से जीत पाई थी.
कैटेगरी C: ऐसी सीटें जहां लगातार दो बार से बहुत कम वोटों के अंतर से हार मिल रही है.
कैटेगरी D: ये सपा और कांग्रेस के वो परंपरागत गढ़ हैं, जिन्हें भेदना बीजेपी के लिए सबसे कठिन काम है.
पार्टी का विशेष ध्यान उन 61 सीटों पर है, जहां 2012, 2017 और 2022 के चुनावों में बीजेपी एक बार भी नहीं जीत सकी. यहाँ नए सिरे से जातीय समीकरणों और लाभार्थियों से संपर्क का नया सर्वे शुरू किया जा रहा है.
पुराने चेहरों पर चलेगी कैंची, चुनौतियां भी कम नहीं
इस बार टिकट बांटने का फॉर्मूला बेहद सख्त रखा गया है. तीन या उससे अधिक बार चुनाव लड़ चुके नेताओं के बूथ-वार प्रदर्शन का पूरा बही-खाता जांचा जा रहा है. अगर अपने खुद के बूथ पर वोट प्रतिशत कम मिला, तो टिकट कटना तय है.
हालांकि, बीजेपी के सामने मुश्किलें भी कम नहीं हैं. अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का विवाद विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बन गया है. ट्रस्ट इस डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन चुनाव से पहले यह मामला पार्टी के लिए एक संवेदनशील चुनौती बन गया है.
अखिलेश का रथ और बीजेपी की घेराबंदी
उधर, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ‘पीडीए’ (PDA) फॉर्मूले और अपनी आगामी रथ यात्रा के जरिए सड़कों पर उतरकर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं. वे मंदिर विवाद को सीधे तौर पर सरकार की नाकामी के तौर पर पेश कर रहे हैं. साफ है कि बीजेपी का यह ‘ऑपरेशन यूपी’ जितना सटीक है, विपक्ष की घेराबंदी भी उतनी ही आक्रामक होने वाली है.
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-भारत एक्सप्रेस
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