Global Stock Market Crash: सोमवार (20 जुलाई) का कारोबारी दिन दुनियाभर के शेयर बाजारों के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा. एशिया से लेकर यूरोप तक कई बड़े बाजारों में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिसका असर भारत पर भी साफ नजर आया. निवेशकों ने दिन की शुरुआत ही भारी दबाव के साथ की और कुछ ही घंटों में कई देशों के बाजार लाल निशान में पहुंच गए. इस गिरावट ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
भारतीय बाजार भी दबाव में
भारतीय शेयर बाजार ने भी कमजोर शुरुआत की. बीएसई सेंसेक्स कारोबार के शुरुआती दौर में ही सैकड़ों अंक फिसल गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी अहम स्तरों से नीचे चला गया. सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला. इन क्षेत्रों में लगातार बिकवाली के कारण बाजार का माहौल कमजोर बना रहा.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया. निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय फिलहाल इंतजार की रणनीति अपनाना बेहतर समझा.
एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट
भारत ही नहीं, एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई. जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स चार प्रतिशत से ज्यादा टूट गया, जबकि टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली.
विश्लेषकों का कहना है कि एआई सेक्टर में पिछले लंबे समय से चली आ रही तेजी के बाद अब निवेशकों को ऊंचे वैल्यूएशन की चिंता सताने लगी है. इसी वजह से टेक शेयरों में दबाव बढ़ा और इसका असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया. पाकिस्तान के शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे यह साफ हो गया कि निवेशकों की चिंता किसी एक देश तक सीमित नहीं है.
यूरोप में भी नहीं थमी बिकवाली
यूरोपीय बाजार भी इस वैश्विक दबाव से बच नहीं सके। ब्रिटेन समेत कई प्रमुख यूरोपीय शेयर सूचकांकों ने गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. निवेशकों की नजर खास तौर पर पश्चिम एशिया के हालात पर बनी हुई है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बाजार की चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है.
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है. तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका फिर मजबूत हुई है. यदि ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर वैश्विक आर्थिक विकास और कंपनियों की लागत दोनों पर पड़ सकता है.
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आखिर बाजार में इतनी घबराहट क्यों?
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा गिरावट किसी एक वजह से नहीं आई है, बल्कि कई बड़े कारण एक साथ सामने आए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कुछ बड़ी कंपनियों के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजे, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और भारतीय रुपये में कमजोरी जैसे कारकों ने भी बाजार का भरोसा डगमगा दिया है.
ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है.
-भारत एक्सप्रेस
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