केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के साथ फिल्म और टीवी जगत से भी आवाजें सामने आने लगी हैं. टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए एक ऐसा सवाल उठाया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
शनिवार को श्वेता तिवारी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया. इस वीडियो में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके नजर आ रहे हैं. वीडियो में दिपके कहते हैं कि जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, तो अब कैबिनेट के उन सभी मंत्रियों से भी जवाब मांगा जा सकता है, जो अपने काम को सही तरीके से नहीं निभा रहे हैं.
इसी वीडियो को साझा करते हुए श्वेता तिवारी ने सवाल किया कि अगर जवाबदेही की बात हो रही है, तो फिर पंजाब के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कब होगा? उन्होंने पोस्ट में कॉकरोच जनता पार्टी को टैग करते हुए पूछा कि पंजाब में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन कब शुरू किए जाएंगे.
छात्रों के आंदोलन के बाद बढ़ा दबाव
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पिछले कई दिनों से देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा था. राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र और अभिभावक परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. सबसे बड़ा मुद्दा नीट-यूजी परीक्षा से जुड़ी कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर था.
छात्रों का कहना था कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. इसी मांग के साथ लगातार प्रदर्शन किए जा रहे थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ती गई.
पुलिस कार्रवाई के बाद और बढ़ा विरोध
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद यह आंदोलन और ज्यादा चर्चा में आ गया. पुलिस की सख्ती को लेकर कई जगहों पर नाराजगी देखने को मिली. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग छात्रों के समर्थन में सामने आए और आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने लगा.
देखते ही देखते यह विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा. पहले देश के बड़े शहरों में प्रदर्शन हुए और फिर छोटे शहरों और कस्बों में भी छात्र और आम लोग परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने लगे.
सोनम वांगचुक के अनशन ने भी खींचा ध्यान
इस पूरे आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी लगातार चर्चा में रहे. वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे. 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल ले गई. अधिकारियों का कहना था कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और मेडिकल सलाह के साथ-साथ दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए यह कदम उठाया गया.
सोनम वांगचुक ने कुल 21 दिनों तक अनशन किया. बाद में उन्होंने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया. हालांकि, उनके आंदोलन ने परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और छात्रों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इस पूरे मामले पर अलग-अलग वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. श्वेता तिवारी का सोशल मीडिया पोस्ट भी इसी बहस का हिस्सा बन गया है, जिसमें उन्होंने जवाबदेही के सवाल को दूसरे राज्यों तक बढ़ाने की बात कही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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