DU PhD Admission 2026
DU PhD Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में रिसर्च करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है. विश्वविद्यालय ने पीएचडी (PhD) में दाखिले के नियमों में अहम बदलाव किया है. अब चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) पूरा करने वाले छात्र बिना मास्टर डिग्री किए सीधे पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे. डीयू की एकेडमिक काउंसिल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस फैसले का उद्देश्य योग्य छात्रों को जल्दी रिसर्च के क्षेत्र में आने का अवसर देना और उच्च शिक्षा को नई दिशा देना है.
अब बिना मास्टर के करें PHD
अब तक पीएचडी में दाखिले के लिए छात्रों को पहले ग्रेजुएशन और उसके बाद दो साल की मास्टर डिग्री पूरी करनी पड़ती थी. यानी MA, M.Sc, M.Com या किसी अन्य पोस्टग्रेजुएट कोर्स के बाद ही रिसर्च की राह खुलती थी. लेकिन नए नियम लागू होने के बाद चार साल का FYUP पूरा करने वाले छात्र इस अतिरिक्त चरण को छोड़कर सीधे पीएचडी के लिए आवेदन कर सकेंगे. इससे छात्रों का एक से दो साल का समय बचेगा और वे कम उम्र में ही अपने रिसर्च करियर की शुरुआत कर पाएंगे.
क्या हैं जरूरी नियम?
हालांकि, यह सुविधा हर छात्र को नहीं मिलेगी. इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें भी तय की गई हैं. उम्मीदवार ने चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा किया हो और उसके कम से कम 75 प्रतिशत अंक या उसके बराबर सीजीपीए होना चाहिए. वहीं SC, ST, OBC (नॉन-क्रीमी लेयर), EWS और PwBD श्रेणी के उम्मीदवारों को 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी जाएगी. यानी इन वर्गों के छात्र 70 प्रतिशत अंकों के साथ भी आवेदन कर सकेंगे.
ध्यान देने वाली बात यह है कि तीन साल की पारंपरिक ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों के लिए पुराने नियम ही लागू रहेंगे. ऐसे उम्मीदवारों को पहले मास्टर डिग्री पूरी करनी होगी और उसमें न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को यहां भी नियमानुसार छूट मिलेगी. इसके अलावा, M.Phil कर चुके योग्य उम्मीदवार पहले की तरह पीएचडी में आवेदन करने के पात्र रहेंगे.
इंटव्यू के बाद होगा एडमिशन
पीएचडी में प्रवेश की प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. उम्मीदवारों को UGC NET, CSIR NET या विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित प्रवेश परीक्षा की शर्तें पूरी करनी होंगी. इसके बाद इंटरव्यू होगा और अंतिम चयन विश्वविद्यालय के तय नियमों के अनुसार किया जाएगा. यानी सीधे आवेदन की सुविधा मिलने के बावजूद चयन पूरी तरह मेरिट और प्रवेश प्रक्रिया के आधार पर ही होगा.
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सवाल को घेरों में फैसला
इस फैसले को लेकर कुछ सवाल भी उठे हैं. एकेडमिक काउंसिल के कुछ सदस्यों का कहना है कि चार वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में आने वाले छात्रों के लिए आरक्षण संबंधी नियमों को और स्पष्ट किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि इस नई श्रेणी के लिए अलग दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह का भ्रम न रहे. साथ ही कुछ सदस्यों ने रिसर्च स्कॉलर्स को मिलने वाली नॉन-जेआरएफ (Non-JRF) फेलोशिप बढ़ाने की मांग भी रखी है.
-भारत एक्सप्रेस
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