पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भले ही अब इस दुनिया में नही है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनकी आत्मा को शांति मिली होगी. कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को बंद करने का निर्देश जारी किया है.
कार्रवाई करने का कोई कारण नहीं
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने मनमोहन सिंह की अपील को मंजूरी देते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर उन्हें ट्रायल का सामना करने के लिए समन जारी किया गया था. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की वलोजर रिपोर्ट को खारिज करने या उनके खिलाफ संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमने सीबीआई की दोनों क्लोजर रिपोर्ट का अध्ययन किया है.
विवादित फैसले को किया रद्द
जांच एजेंसी की रिपोर्ट स्वीकार करने के संबंध में इस अदालत द्वारा लगातार तय किए गए संबंधित पैमानों को ध्यान में रखते हुए, हम इस बात से संतुष्ट हैं कि न्यायाधीश के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और मामले का संज्ञान लेने का कोई कारण नहीं था.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम अपील को स्वीकार करते हैं और विवादित फैसले को रद्द करते हैं. नतीजतन हम सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हैं और मामले को बंद करते हैं.
मनमोहन सिंह पर लगे आरोप
बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पटियाला हाउस कोर्ट ने 2015 में समन जारी किया था. 26 दिसंबर 2024 को मनमोहन सिंह की 92 साल की उम्र में निधन हो गया था, वे देश के राजनीतिक और आर्थिक परिवेश में एक गहरी छाप छोड़ गए है. मनमोहन सिंह पर पारदर्शिता का पालन न करते हुए निजी कंपनियों को माइनिंग के अधिकार देने का आरोप था.
उनपर लगे आरोपों में भ्रष्टाचार, भरोसे को तोड़ना और आपराधिक षड्यंत्र शामिल था. मामले में हिंडाल्को के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख, हिंडाल्को के अधिकारी शुबेन्दु अमिताभ और डी भट्टाचार्या समेत 6 लोगो को आरोपी बनाया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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