भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) की चालू वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी द्विमासिक समीक्षा बैठक 5 अगस्त से 7 अगस्त 2026 तक आयोजित होने जा रही है. बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा 7 अगस्त की सुबह आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास करेंगे.
इस बैठक पर शेयर बाजार, निवेशकों और आम बैंक कर्जदारों (Borrowers) की निगाहें टिकी हुई हैं, जो लंबे समय से होम लोन और कार लोन की ईएमआई (EMI) कम होने का इंतजार कर रहे हैं.
रेपो रेट पर क्या है जानकारों की राय?
आर्थिक विशेषज्ञों और विभिन्न वित्तीय रेटिंग एजेंसियों के अनुसार, आरबीआई इस बार भी नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) को 6.50 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है.
महंगाई और विकास दर का संतुलन: खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) नियंत्रण में आ रही है, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक (Geopolitical) चिंताओं के कारण केंद्रीय बैंक सावधानी बरत सकता है.
आर्थिक विकास (GDP Growth): भारत की जीडीपी विकास दर मजबूत बनी हुई है, जिससे आरबीआई को ब्याज दरें तुरंत घटाने का अत्यधिक दबाव महसूस नहीं हो रहा है.
क्या घट सकती है आपकी ईएमआई?
यदि आरबीआई रेपो रेट में कटौती का फैसला लेता है, तो बैंकों द्वारा व्यावसायिक और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में कमी की जाएगी, जिससे ग्राहकों की मासिक ईएमआई का बोझ कम होगा. हालांकि अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि दर कटौती (Rate Cut) का चक्र इस साल की अंतिम तिमाही में ही शुरू हो सकता है.
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