फोटो क्रेडिट- भारत एक्सप्रेस
Chhura Eklavya School NEET Success: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक में स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के जनजातीय बच्चे अब जंगल से वनोपज तलाशने की सदियों पुरानी परंपरा से आगे बढ़कर डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह पर अग्रसर हैं. कभी विषम परिस्थितियों और सीमित साधनों में जीवन जीने वाले इन बच्चों के हौसलों को सही मार्गदर्शन, आधुनिक संसाधन और शिक्षकों की लगन ने नई उड़ान दी है.
नीट-यूजी में 15 विद्यार्थियों का परचम
इस वर्ष विद्यालय के 15 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में शानदार सफलता हासिल की है. इनमें 11 छात्र और 4 छात्राएं शामिल हैं. सबसे खास बात यह है कि सफल विद्यार्थियों में ‘विशेष पिछड़ी जनजाति’ कमार समाज का एक छात्र और एक छात्रा भी शामिल हैं. जिन जनजातीय परिवारों का जीवन कभी जंगलों तक सीमित था, आज उनके बच्चे सफेद कोट पहनकर समाज की सेवा करने के सपने को साकार कर रहे हैं.
एक ही सत्र में दर्ज कीं 49 राष्ट्रीय सफलताएं
लगभग 480 विद्यार्थियों की क्षमता वाले इस विद्यालय ने शैक्षणिक उत्कृष्टता का नया मानदंड स्थापित किया है. इस वर्ष विभिन्न उच्च शिक्षा और प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में संस्थान के विद्यार्थियों ने कुल 49 सफलताएं दर्ज की हैं:
नीट (NEET): 15 विद्यार्थी
एनसीईटी (NCET): 15 विद्यार्थी
आईटीईपी (ITEP): 8 विद्यार्थी
बीएससी नर्सिंग: 4 विद्यार्थी
बी.फार्मा: 4 विद्यार्थी
जेईई मेन्स (JEE Mains): 3 विद्यार्थी
एनआईएफटी और सीयूईटी: 2-2 विद्यार्थी
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और आधुनिक शिक्षण पद्धति
विद्यालय में पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ अब नीट, जेईई, आईआईएसईआर, एम्स और सीयूईटी जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं की विशेष तैयारी कराई जा रही है.
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू हुए इस सेंटर में पूरे छत्तीसगढ़ से 60 प्रतिभावान विद्यार्थियों (30 मेडिकल और 30 इंजीनियरिंग) का चयन कर उन्हें उच्च स्तरीय कोचिंग दी जा रही है.
डिजिटल शिक्षा व एआई: विद्यार्थियों को टैबलेट, लैपटॉप और डिजिटल स्क्रीन से पढ़ाया जा रहा है. साथ ही उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है.
ग्रीष्मकालीन कक्षाएं व मेंटरशिप: नीट अभ्यर्थियों के लिए गर्मी की छुट्टियों में विशेष कक्षाएं चलाई गईं. बड़े शहरों में अध्ययनरत मेधावी विद्यार्थियों को आमंत्रित कर संवाद कराया जाता है, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत होता है.
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50% से 100% तक का सफलता का सफर
विद्यालय के प्राचार्य कमलकांत यादव के अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व जब उन्होंने पदभार संभाला था, तब विद्यालय का परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत के आसपास रहता था. 35 समर्पित शिक्षकों की टीम के साथ निरंतर रणनीति, अनुशासन और अतिरिक्त कक्षाओं के बल पर आज परिणाम 100 प्रतिशत तक पहुंच चुका है.
दिल्ली में लहराया परचम, मिला 1 करोड़ का पुरस्कार
अकादमिक प्रदर्शन के अलावा विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी श्रेष्ठता साबित की है. जनवरी 2026 में भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित ‘राष्ट्रीय मॉडल युवा ग्राम सभा’ में देश भर के 700 विद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए छुरा के इस विद्यालय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि हासिल की. छुरा का एकलव्य विद्यालय आज इस बात का जीवंत उदाहरण बन चुका है कि यदि जनजातीय और विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को सही अवसर, संसाधन और दिशा मिले, तो वे किसी भी राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं.
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