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‘खैरात नहीं, अधिकार मांग रहे हैं’ पुणे में आदिवासी छात्रों के समर्थन में उतरे राहुल गांधी, सीएम फडणवीस को लिखा पत्र

महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी समुदाय के छात्र पिछले 13 दिनों से हॉस्टल सुविधा और छात्र कल्याण से जुड़ी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं. छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों को लेकर 50 फीसदी राजी है और 50 फीसदी पर टालमटोल कर रहा है.

Rahul Gandhi

महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी समुदाय से आने वाले छात्रों का आंदोलन लगातार 13वें दिन भी जारी है. छात्र हॉस्टल की सुविधा, पढ़ाई के लिए बेहतर व्यवस्था और छात्र कल्याण से जुड़ी कई मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रशासन उनकी कुछ मांगों पर सहमति जता रहा है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी साफ जवाब नहीं दिया जा रहा. छात्रों की सबसे बड़ी नाराजगी इसी बात को लेकर है कि उन्हें मौखिक आश्वासन तो मिल रहे हैं, लेकिन लिखित तौर पर कोई ठोस भरोसा नहीं दिया जा रहा है.

आंदोलनकारी छात्रा सुचित्रा के मुताबिक, प्रशासन लगभग आधी मांगों पर सहमत है, जबकि बाकी मुद्दों को लेकर सिर्फ यह कहा जा रहा है कि सरकार इस पर विचार करेगी. छात्रों का कहना है कि वे अब केवल आश्वासन सुनकर आंदोलन खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं. उनका साफ कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा.

छात्रों की प्रमुख मांगों में हॉस्टल को कॉलेज और शहर के सुविधाजनक इलाके में लाने की मांग शामिल है. सुचित्रा ने बताया कि मौजूदा हॉस्टल सोलापुर बॉर्डर की तरफ है और वहां से कॉलेज पहुंचने में काफी समय लग जाता है. ट्रैफिक की वजह से आने-जाने में करीब चार घंटे तक खर्च हो जाते हैं.

छात्रों का कहना है कि इतनी लंबी यात्रा का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है. कई छात्र-छात्राएं दिन का बड़ा हिस्सा कॉलेज आने-जाने में ही गंवा देते हैं. खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति मुश्किल है जिन्हें लैब या अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए देर तक कॉलेज में रुकना पड़ता है.

सुचित्रा ने बताया कि कई बार वे रात करीब आठ बजे हॉस्टल लौटते हैं. ऐसे में पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय निकालना मुश्किल हो जाता है. छात्रों का सवाल है कि जब उनका मकसद अच्छी शिक्षा हासिल कर आगे नौकरी पाना है, तो इतनी खराब यात्रा व्यवस्था के बीच वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान कैसे दे पाएंगे.

राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

इस आंदोलन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी समर्थन सामने आया है. सुचित्रा के मुताबिक, उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात कर छात्रों की परेशानियां बताई थीं. उनकी एक दोस्त ने भी अपनी समस्या राहुल गांधी के सामने रखी थी. सुचित्रा का कहना है कि राहुल गांधी ने छात्रों की बात को गंभीरता से सुना और मदद का भरोसा दिया.

छात्रा के मुताबिक, मुलाकात के करीब दो दिन बाद राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजा गया. इसमें छात्रों की मांगों का जल्द समाधान करने की अपील की गई है. सुचित्रा ने दावा किया कि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए 10 दिनों के भीतर छात्रों की मांगों पर कार्रवाई करने की बात कही है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाधान नहीं हुआ तो वे खुद छात्रों के आंदोलन में शामिल होंगे.

छात्रों ने इसे अपने आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण समर्थन बताया है. हालांकि, उनका कहना है कि अब उन्हें सिर्फ राजनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि सरकार की तरफ से लिखित और स्पष्ट निर्णय चाहिए.

आरक्षित पदों पर भी उठा सवाल

आंदोलन में शामिल एक अन्य छात्र सूरज ने आदिवासी उम्मीदवारों से जुड़े करीब 12,500 आरक्षित रिक्त पदों का मुद्दा भी उठाया. उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के 2017 के आदेश में वास्तविक आदिवासी उम्मीदवारों को उनका अधिकार देने और फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी.

सूरज का आरोप है कि इतने समय बाद भी इस मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. छात्रों की मांग है कि आरक्षित पदों को लेकर सरकार स्पष्ट कदम उठाए और योग्य आदिवासी उम्मीदवारों को उनका हक मिले.

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-भारत एक्सप्रेस



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