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‘चिंचपोकली चा चिंतामणि’ का 107वां साल…अडानी ग्रुप का मिला साथ, तिरुपति बालाजी के रूप में विराजे बाप्पा

मुंबई के प्रसिद्ध ‘चिंचपोकली चा चिंतामणि’ गणेशोत्सव मंडल ने अपने 107वें वर्ष में तिरुपति बालाजी से प्रेरित बाप्पा की भव्य प्रतिमा स्थापित की है.

Chinchpokli

मुंबई के चिंचपोकली चा चिंतामणि का 107वां गणेशोत्सव

Chinchpokli Cha Chintamani 2026: मायानगरी मुंबई में गणेशोत्सव की बहार शुरू हो चुकी है. मुंबई के ऐतिहासिक लालबाग, परेल और गिरनगांव की गलियां शनिवार को ‘गणपति बाप्पा मोरया’ के जयकारों और ढोल-ताशा की गूंज से सराबोर हो गईं. मौका था प्रसिद्ध ‘चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल’ के 107वें वर्ष के ‘चिंचपोकली चा चिंतामणि’ के भव्य आगमन सोहला (Aagman Sohla) का. इस साल बाप्पा का रूप और पंडाल का नजारा इतना अलौकिक है कि दर्शन के लिए देश भर से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है.

अडानी ग्रुप के साथ जुड़ा चिंचपोकली मंडल का नाम(Chinchpokli Cha Chintamani 2026)

मुंबई के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित गणेशोत्सव मंडलों में से एक ‘चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल’ ने अपने 107वें ऐतिहासिक उत्सव को अब तक का सबसे भव्य और यादगार बनाने के लिए देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी के अडानी ग्रुप (Adani Group) के साथ हाथ मिलाया है. अडानी ग्रुप के इस बड़े सहयोग के बाद इस बार चिंतामणि बाप्पा के आगमन से लेकर दर्शन व्यवस्था और भव्य पंडाल के निर्माण को एक नए वर्ल्ड-क्लास लेवल पर ले जाया गया है.

 

तिरुपति बालाजी के अलौकिक रूप में बाप्पा

हर साल अपनी अनोखी और अद्भुत थीम के लिए पहचाने जाने वाले चिंतामणि बाप्पा का रूप इस बार बेहद खास है. इस 107वें साल में ‘चिंचपोकली चा चिंतामणि’ की मूर्ति को भगवान वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) से प्रेरित होकर तैयार किया गया है. बाप्पा के इस रूप में गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और माथे पर पवित्र कपूर का तिलक सुशोभित है, जिसे देखकर भक्त भाव-विभोर हो रहे हैं.

हैदराबाद के स्वर्णगिरि मंदिर जैसा भव्य पंडाल

मंडल ने इस बार पंडाल को दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला का रूप दिया है. पंडाल की डिजाइन हैदराबाद के स्वर्णगिरि और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर की तर्ज पर तैयार की गई है. विशाल और ऊंचे ‘गोपुरम’, जगमगाते ‘दीपस्तंभ’ और नक्काशीदार ‘व्याल’ (पारंपरिक मंदिर रक्षक) की मूर्तियां पंडाल को एक भव्य और दिव्य रूप दे रही हैं.

1920 से चला आ रहा इतिहास

मुंबई के ऐतिहासिक कपड़ा मिल क्षेत्र (Girangaon) में साल 1920 में स्थापित यह मंडल शहर की सांस्कृतिक विरासत का एक बेहद अहम हिस्सा है. मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र डिचोलकर ने बताया कि बेहतरीन कारीगरों, कलाकारों और आधुनिक तकनीक की मदद से इस भव्य कांसेप्ट को धरातल पर उतारा गया है. चिंतामणि के आगमन सोहला में बाप्पा की पहली झलक पाने के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और सैकड़ों वालंटियर्स 24 घंटे भक्तों की सेवा में डटे हुए हैं.

-भारत एक्सप्रेस

 



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