DHFL Scam Case: देश के सबसे चर्चित बैंक घोटालों में शामिल डीएचएफएल (DHFL) मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को दिल्ली की अदालत से करारा झटका लगा है. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटरों कपिल वधावन और धीरज वधावन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (विश्वासघात) और 467 (जालसाजी) जैसी गंभीर अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया है.
विशेष जज संजीव कुमार मल्होत्रा ने सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत अपने ही दिए आदेश की समीक्षा नहीं कर सकती, जब तक कि उसमें कोई टाइपिंग या क्लर्क की गलती न हो जिसे सुधारना बेहद जरूरी हो. सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 216 के तहत अर्जी दाखिल कर 30 जुलाई 2026 को तय किए गए आरोपों में संशोधन करने और षड्यंत्र की धारा 120बी का दायरा बढ़ाने की मांग की थी.
लगभग ₹35,000 करोड़ की महाठगी का आरोप
सीबीआई का आरोप है कि वधावन बंधुओं ने बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला रचा. उन्होंने 17 बैंकों के कंसोर्टियम (संघ) के साथ लगभग 34,926.77 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. इस मामले में सीबीआई ने कपिल वधावन को जुलाई 2022 में गिरफ्तार किया था और अक्टूबर 2022 में दाखिल चार्जशीट में उन्हें मुख्य सूत्रधार बताया था.
दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 अगस्त 2025 को दोनों भाइयों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी में कहा था कि यह एक पूर्व-नियोजित और सुनियोजित आर्थिक अपराध है, जिसने देश के वित्तीय ताने-बाने और निवेशकों के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है.
कोर्ट के फैसले के मायने
निचली अदालत के इस फैसले से सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं. कोर्ट का मानना है कि आरोप तय होने के बाद बिना किसी ठोस क्लैरिकल आधार के नई गंभीर धाराएं जोड़ना कानूनी नियमों के मुताबिक सही नहीं है. हालांकि, दोनों भाइयों की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है, इसलिए वे फिलहाल जेल में ही रहेंगे, लेकिन इस नए आदेश से वधावन बंधुओं को बड़ी कानूनी राहत मिली है.
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-भारत एक्सप्रेस
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