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युवा वकीलों को इलाहाबाद हाई कोर्ट की नसीहत, कहा- गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों को जबरन अदालत में पेश होने से रोके जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि कुछ लोगों के चाहने से न्यायिक कामकाज नहीं रोका जा सकता.

Allahabad High Court Strict Remark Lawyers Stopping Court Proceedings
Edited by Vaibhav Gupta

अदालतों में काम रोकने या साथी वकीलों को जबरन पैरवी से रोकने का चलन न्याय व्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में इसी मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने एक जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में वकीलों द्वारा मचाए गए हंगामे और साथियों को धमकाने पर गहरी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि वकीलों का एक छोटा सा वर्ग अगर यह चाहे कि अदालतें न चलें, तो इस आधार पर न्यायिक कामकाज को ठप नहीं किया जा सकता, जबकि बहुसंख्यक वकील अपने मुकदमों की सुनवाई चाहते हैं.

महिला वकील के साथ बदसलूकी और हंगामा

यह पूरा मामला तब सामने आया जब कोर्ट नंबर 66 में एक जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी. संशोधित सूची आने और दोबारा पुकार होने के बावजूद जब आवेदक का पक्ष रखने कोई नहीं पहुंचा, तो कोर्ट ने तह तक पड़ताल की. अदालत के संज्ञान में आया कि कुछ वकीलों ने बहस करने आए साथी अधिवक्ताओं और यहां तक कि सरकारी वकीलों को भी जबरन कोर्ट रूम में आने से रोक दिया था.

सुनवाई के दौरान जज ने खुद एक महिला अधिवक्ता की चीख-पुकार सुनी, जो अपने केस की पैरवी के लिए अंदर आना चाहती थीं, लेकिन उनके साथ बदतमीजी की गई. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ वकीलों का ऐसा गैर-जिम्मेदाराना रवैया बार और बेंच दोनों की गरिमा को धूमिल कर रहा है.

सोशल मीडिया पर पोस्ट और युवा वकीलों को नसीहत

हाईकोर्ट ने इस दौरान सोशल मीडिया पर चल रही उन बहसों का भी संज्ञान लिया, जिन्हें कुछ युवा वकीलों द्वारा तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा था. कोर्ट ने युवा अधिवक्ताओं को सलाह दी कि वे रील्स और लाइक्स बटोरने के चक्कर में पड़ने के बजाय अपनी पढ़ाई और मुकदमों की तैयारी पर ध्यान दें, क्योंकि वही देश और न्यायपालिका का भविष्य हैं.

अदालत ने चेताया कि अगर जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठा, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान वकीलों को ही उठाना पड़ेगा. अंत में कोर्ट ने बार एसोसिएशन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की उम्मीद जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 के लिए मुकर्रर कर दी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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