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सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग से सवाल, पूछा- वोटों की गिनती के लिए ‘टोटलाइजर मशीन’ के इस्तेमाल में क्या दिक्कत है?

सुप्रीम कोर्ट में टोटलाइजर मशीनों के इस्तेमाल को लेकर दायर याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से दो सप्ताह में जवाब मांगा है.

मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई.

भारत में वैवाहिक दुष्कर्म की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई, जिसमें केंद्र और राज्यों के रुख पर फैसला होना है. (PC: भारत एक्सप्रेस)

ईवीएम को लेकर पहले से ही विपक्ष सवाल उठाता रहा है, लेकिन इसी बीच टोटलाइजर मशीनों के इस्तेमाल को लेकर देश के सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसपर सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है.

यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय सहित अन्य की ओर से दायर की गई है.कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि टोटलाइजर मशीनों को लगाने में क्या दिक्कत है. टोटलाइजर एक ऐसा डिवाइस है जिससे लगभग 14 पोलिंग बूथ पर डाले गए वोटों की गिनती एक साथ की जा सकती है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि टोटलाइजर मशीनों के इस्तेमाल से किसी विशेष पोलिंग बूथ पर किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले. इससे संबंधित जानकारी नही मिल पाएगी.

टोटलाइजर मशीनों को लगाने से उस बूथ के मतदाताओं की पहचान कर उन्हें संभावित रूप से प्रताड़ित किए जाने का खतरा कम किया जा सकेगा. याचिकाकर्ता की मांग है कि इस तरह के टोटलाइजर मशीनों को लगाने से मतदाता की गोपनीयता और मतदाताओं की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि टोटलाइजर लागू करने में कोई बाधा है या नही. उन्होंने यह भी पूछा कि टोटलाइजर मशीनों को लागू करने से क्या कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा क्या? सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि चुनाव आयोग इस संबंध में केंद्र सरकार को उचित प्रस्ताव या अपना पक्ष भेज सकता है और केंद्र सरकार उस प्रस्ताव पर फैसला करे. याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने मांग की है कि चुनाव में टीचर को डियूटी पर न लगाया जाए, वन नेशन एक वोटर की नीति को अपनाया जाए और वोटर बनाने का काम पोस्ट ऑफिस को दिया जाए.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि बूथ-वार गिनती के लिए छूट का सिद्धांत ईवीएम पर भी लागू न हो. जबकि चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) से जुड़े मुद्दे की ओर इशारा किया. नायडू ने एन चंद्रबाबू नायडू मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पहले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि टोटलाइजेशन शुरू करने से ऐसा क्रॉस वेरिफिकेशन मुश्किल हो सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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