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संभल हिंसा: पुलिस कस्टडी के कबूलनामे पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, अफरोज की जमानत पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में एनएसए के तहत हिरासत में लिए गए मुल्ला अफरोज की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अबु सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग खारिज की.

सुप्रीम कोर्ट

संभल हिंसा मामले में एनएसए के तहत हिरासत में लिए एक मुल्ला अफरोज की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से अहम सवाल पूछे है. कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया जा सकता है.

मुल्ला अफरोज ने एनएसई के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी है. मुल्ला अफरोज पर 2024 की संभल हिंसा का मास्टरमाइंड होने का आरोप है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा क्या पुलिस कस्टडी में कबूलनामे के आधार पर एनएसए के तहत हिरासत का आदेश जारी किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में किए गए कथित कबूलनामे की प्रासंगिकता और महत्व पर सवाल उठाए है.

कोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसा कबूलनामा एहतियाती हिरासत का आदेश जारी करने के लिए जरूरी व्यक्तिगत संतुष्टि का आधार बन सकता है. मुल्ला अफरोज को 17 जनवरी 2025 को थाना नखासा, संभल पुलिस ने गिरफ्तार किया था. बाद में 13 अगस्त2025को जिला मजिस्ट्रेट संभल ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 3 (2) के तहत नजरबंद कर दिया.

शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान भड़की हिंसा

इस आदेश को 28 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने 12 महीने के लिए पुष्टि की. संभल में इस विवाद की शुरुआत 19 नवंबर 2024को हुई थी, जबकि हिंदू पक्ष के समर्थकों ने संभल की अदालत में बहस का दावा किया था कि शहर में शाही जमा मस्जिद का सर्वेक्षण किया गया, जबकि बाकी का सर्वक्षण 24 नवंबर 2024 को होना था.

उसी दिन सर्वेक्षण के दौरान स्थिति और अशांति शुरू हो गई. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 29 लोग घायल हो गए थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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