प्रयागराज में अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिली है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वकीलों के लिए 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की घोषणा की है. इसके साथ ही अधिवक्ता कल्याण निधि की सहायता राशि बढ़ाने, दिवंगत वकीलों के परिवारों को मिलने वाली मदद की उम्र सीमा बढ़ाने और सरकारी वकीलों के मानदेय में बढ़ोतरी जैसे कई अहम फैसलों का ऐलान किया गया.
प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ता समुदाय से जुड़ी कई मांगों पर सरकार की ओर से बड़ा भरोसा दिया. इस मौके पर उन्होंने करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सुविधाओं का लोकार्पण भी किया. इनमें 10 हजार से ज्यादा अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने इस दौरान अधिवक्ताओं को चैंबर की चाबियां भी सौंपीं.
हर साल 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज
मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी घोषणाओं में अधिवक्ताओं के लिए मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम शामिल रही. इसके तहत प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को हर साल 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है. इससे गंभीर बीमारी या अचानक आने वाले बड़े इलाज के खर्च को लेकर वकीलों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है.
इसके अलावा अधिवक्ता कल्याण निधि के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को भी बढ़ाया गया है. अभी तक यह राशि 1.5 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है.
दिवंगत अधिवक्ताओं के परिवारों के लिए भी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है. असामयिक निधन की स्थिति में आर्थिक सहायता पाने के लिए पहले 60 वर्ष की उम्र सीमा थी. अब इसे बढ़ाकर 70 वर्ष कर दिया गया है.
नए चैंबरों के लिए भी सरकार देगी बजट
प्रयागराज में तैयार किए गए नए अधिवक्ता चैंबरों में फर्नीचर और दूसरी जरूरी सुविधाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से इन सुविधाओं को लेकर जो भी प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उसे पूरा सहयोग और जरूरी बजट उपलब्ध कराएगी.
सरकार से जुड़े मुकदमों की निगरानी और कामकाज को डिजिटल बनाने के लिए 400 सरकारी वकीलों और विधि अधिकारियों को टैबलेट देने की भी घोषणा की गई है.
वहीं जिला अदालतों, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से पैरवी करने वाले विधि अधिकारियों के मानदेय में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है.
10 जिलों में बन रहे इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स
मुख्यमंत्री ने न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए चल रहे कामों की भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किराए के भवनों में चल रही जिला अदालतों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रदेश के 10 जनपदों में आधुनिक सुविधाओं से लैस इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स तैयार किए जा रहे हैं.
त्वरित न्याय के लिए 900 से ज्यादा फास्ट ट्रैक अदालतों को मंजूरी दिए जाने की बात भी सामने रखी गई. अदालतों और जेलों में हाई-स्पीड इंटरनेट तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है. पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता को भी सालाना 3 हजार से बढ़ाकर 60 हजार तक किए जाने का ब्योरा दिया गया.
युवा वकीलों को नई तकनीक अपनाने की सलाह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा अधिवक्ताओं से भी समय के साथ खुद को बदलने की अपील की. उन्होंने कहा कि आज वकालत सिर्फ पारंपरिक कानूनी ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है. युवा वकीलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर लॉ और डेटा प्राइवेसी जैसे नए क्षेत्रों की जानकारी हासिल करनी चाहिए.
उनका कहना था कि आने वाले समय की कानूनी जरूरतों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को तैयार रखना होगा. साथ ही आम आदमी का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करना भी जरूरी है.
अधिवक्ता समाज के लिए बड़ा दिन- केशव मौर्य
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अधिवक्ताओं को बधाई दी. उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के गौरवशाली इतिहास को देश की न्यायिक परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर बताया.
मौर्य ने अपने अंदाज में राजनीतिक संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि हर पांच साल में जनता की अदालत में जाते हैं और अब 2027 का मुकदमा जनता की अदालत में छोड़ा जा रहा है. उन्होंने सरकार के कामों के लिए अधिवक्ताओं से समर्थन और आशीर्वाद की उम्मीद जताई.
कानून-व्यवस्था को लेकर उन्होंने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा. उनका दावा था कि पहले प्रदेश में कानून का राज कागजों तक सीमित था, जबकि मौजूदा सरकार की नीति अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निर्दोष लोगों की सुरक्षा की है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कार्यक्रम में बार और बेंच के बीच बेहतर तालमेल को न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि बार और बेंच एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं.
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के कई प्रसिद्ध अधिवक्ताओं ने केवल अदालतों में ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार, सार्वजनिक जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वकीलों ने संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा में भी अहम योगदान दिया है.
मुख्य न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि हर समस्या का समाधान तुरंत संभव नहीं होता, लेकिन न्यायपालिका अधिवक्ताओं की चिंताओं को समझते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए लगातार प्रयास करती है.
उनके मुताबिक नए चैंबर और पार्किंग जैसी सुविधाएं केवल भवन निर्माण नहीं हैं. इनका मकसद ऐसा बेहतर माहौल तैयार करना है, जहां अधिवक्ता सम्मान और सुविधा के साथ अपना पेशेवर काम कर सकें.
न्यायपालिका और सरकार के बीच सहयोग पर जोर
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय को भी जरूरी बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि वे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होकर काम करें. जनता को समय पर न्याय मिले और न्यायिक ढांचा बेहतर हो, इसके लिए सहयोग और समन्वय जरूरी है.
उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को इस संस्था की भविष्य की जिम्मेदारी संभालने वाला वर्ग बताया और कहा कि उन्हें बेहतर काम के अवसरों के साथ ऐसा माहौल भी मिलना चाहिए, जिसमें उनकी पेशेवर क्षमता और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके.
11 हजार से ज्यादा वकीलों को मिलेगा चैंबर
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे ने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि नए भवन में 11 हजार से ज्यादा अधिवक्ताओं को पेशेवर जगह उपलब्ध होगी.
उन्होंने बताया कि भवन का उद्घाटन पहले हो चुका था, लेकिन चैंबर आवंटन की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई थी. अब मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश के सहयोग से यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है. इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे अधिवक्ताओं को राहत मिलेगी.
राकेश पांडे ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार के काम की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए जरूरी है कि बार और बेंच के बीच संवाद, सहयोग और भरोसा लगातार बना रहे.
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