Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट ने कारों में सीट बेल्ट के अनिवार्य इस्तेमाल, बच्चों के लिए सुरक्षा सिस्टम (चाइल्ड सेफ्टी सिस्टम) और फर्स्ट एड किट को सख्ती से लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है. अदालत ने सख्त नियम लागू करने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े सुझावों पर विचार करने का निर्देश दिया है. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने प्रसिद्ध डॉक्टर और रिसर्चर डॉ. ज्योतिदेव केशवदेव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया.
याचिकाकर्ता और कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि डॉ. केशवदेव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने डायबिटीज विशेषज्ञ और शोधकर्ता हैं, जिनके नाम पर 300 से अधिक अकादमिक पब्लिकेशन दर्ज हैं. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि वह अपनी इन महत्वपूर्ण सिफारिशों पर विचार के लिए याचिका की एक प्रति सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) को भेज सकते हैं.
ट्रैफिक अनुशासन और कानून व्यवस्था
अदालत ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा सुरक्षा कानूनों का पालन न होना और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमों को सख्ती से लागू न किया जाना मूल रूप से ‘कानून व्यवस्था और यातायात अनुशासन’ बनाए रखने का विषय है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल न्यायिक आदेश जारी कर देने मात्र से धरातल पर कानूनी प्रावधानों के क्रियान्वयन (Implementation) में कोई बड़ी मदद नहीं मिलती, इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सख्ती जरूरी है.
नियमों का दिया गया था हवाला?
याचिकाकर्ता की ओर से सड़क सुरक्षा और यात्रियों के बचाव से जुड़े निम्नलिखित प्रमुख कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया था कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 194B: इसके तहत बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने और यात्रियों द्वारा सीट बेल्ट न लगाने पर जुर्माने व दंड का प्रावधान है. साथ ही, तय उम्र से कम उम्र के बच्चों को सीट बेल्ट या उचित चाइल्ड सेफ्टी सिस्टम के जरिए सुरक्षित रखना भी कानून के दायरे में आता है.
केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 का नियम 138(3) नियम के अनुसार वाहन चलाते समय चालक, अगली सीट पर बैठने वाले सह-यात्रियों और सामने की ओर मुंह करके बैठने वाली पिछली सीट के यात्रियों के लिए भी सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य है.
याचिका के माध्यम से देश भर की सड़कों पर सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने, बच्चों समेत सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम कसने के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था की मांग की गई थी.
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