प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व अध्यक्ष ई. अबूबकर की ओर से मेडिकल ग्राउंड पर दायर की गई अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 23 सितंबर को सुनवाई करेगा. मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अबूबकर की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी ली, जिस पर अदालत को बताया गया कि उनकी हालत स्थिर है. इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस याचिका का विरोध नहीं कर रही है? जवाब में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने स्पष्ट किया कि एजेंसी इस जमानत याचिका का कड़ाई से विरोध कर रही है.
अबूबकर के वकीलों की दलील और मानवीय पहलू
सुनवाई के दौरान ई. अबूबकर की ओर से पेश वकील ने मानवीय आधार (Humanitarian Ground) पर विचार करने का विशेष आग्रह किया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें पहले भरोसा दिलाया गया था कि इस मामले में मानवीय पहलुओं को देखा जाएगा, इसलिए अदालत से अनुरोध किया गया कि बिना पूरी स्थिति समझे कोईल्त जल्दबाजी में निर्णय न लिया जाए.
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और NIA का कड़ा विरोध
बीमारियां और उम्र: याचिका के अनुसार, ई. अबूबकर करीब 70 वर्ष के हैं और वह गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. हिरासत के दौरान उनकी बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें कई बार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ले जाना पड़ा है. इससे पहले उन्होंने हाई कोर्ट में हाउस अरेस्ट (घर में नजरबंद) रखने की गुहार लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था, हालांकि फरवरी में हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल के चिकित्सा अधीक्षक को उनके स्वास्थ्य का नियमित और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.
NIA का तर्क: दूसरी ओर, एनआईए ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया है कि एजेंसी के पास ऐसे पुख्ता सबूत और सामग्री मौजूद हैं जो यह साबित करते हैं कि पीएफआई के कैडरों को अवैध गतिविधियों और आतंकी साजिशों के लिए प्रशिक्षित करने हेतु शिविर आयोजित किए जाते थे. एनआईए ने यह भी अंदेशा जताया कि यदि अबूबकर को रिहा किया जाता है, तो गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और कोई भी उनके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा.
क्या है पूरा मामला और गिरफ्तारी?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश भर में PFI के खिलाफ बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियानों के तहत 22 सितंबर 2022 को ई. अबूबकर को गिरफ्तार किया था. यह राष्ट्रव्यापी छापे केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, दिल्ली और राजस्थान सहित 11 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मारे गए थे.
जांच एजेंसी के मुताबिक, PFI, उसके सदस्यों और पदाधिकारियों ने देश भर में आतंकी वारदातों को अंजाम देने और फंड जुटाने की बड़ी आपराधिक साजिश रची थी. हाल ही में एक अदालत ने ई. अबूबकर समेत अन्य पीएफआई नेताओं और सदस्यों के खिलाफ आतंकी साजिश, टेरर फंडिंग और देश के खिलाफ जंग छेड़ने की साजिश से जुड़े गंभीर आरोप तय किए हैं.
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