Urdu Conclave 2026

‘उर्दू को लिपि में मत बांधो, वो दिलों की जुबान है’, बज़्म-ए-सहाफ़त में बोले शाहिद सिद्दीकी

Urdu Language: भारत एक्सप्रेस उर्दू के Conclave में वक्ताओं ने कहा कि उर्दू केवल एक लिपि नहीं बल्कि आम इंसान के दिल की आवाज है. भाषा को बचाए रखने के लिए इसे AI और कंप्यूटर तकनीक के साथ जोड़ना और परंपरा में जरूरी बदलाव करना बेहद आवश्यक है.

Urdu Language Technology Bharat Express Conclave

Urdu Language Technology Bharat Express Conclave

Urdu Language Technology Bharat Express Conclave: भारत एक्सप्रेस उर्दू के मंच से ‘न्यू इंडिया’ और भाषा के बदलते स्वरूप पर विचार साझा करते हुए शाहिद सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि भाषा केवल किसी विशेष लिपि से नहीं पहचानी जाती. जिस तरह पंजाबी देवनागरी, गुरुमुखी, उर्दू और रोमन में लिखे जाने के बावजूद पंजाबी ही रहती है, उसी तरह उर्दू को भी किसी एक लिपि के दायरे में सीमित नहीं किया जा सकता. ‘जश्न-ए-रेख्ता’ जैसे आयोजनों में उमड़ने वाला विशाल जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि उर्दू सीधे आम इंसान के दिल को छूती है.

भाषा का लचीलापन और ‘हिंदुस्तानी’ का प्रभाव

​उन्होंने कहा कि सत्तर के दशक में जब दूरदर्शन ने शुद्ध हिंदी के अत्यधिक प्रयोग पर जोर देकर उर्दू शब्दों को हटाने की कोशिश की, तो दर्शकों ने दूरदर्शन देखना तक कम कर दिया था. 1980 के दशक में महात्मा गांधी के ‘हिंदुस्तानी भाषा’ के विचार को अपनाकर दूरदर्शन पर कार्यक्रम शुरू किए गए. यही आम बोलचाल की हिंदुस्तानी भाषा आगे चलकर भारतीय मीडिया की पहचान बनी. कोई भी जुबान तभी जिंदा रहती है जब वह जमाने और तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चले.

​किताबत से कंप्यूटर: परंपरा और आधुनिकता का संतुलन

पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए शाहिद सिद्दीकी ने बताया कि उर्दू अखबारों के दफ्तर और किताबत (कैलीग्राफी) की खुशबू में वे पले-बढ़े हैं. इसके बावजूद, उन्होंने महसूस किया कि यदि उर्दू नई तकनीक को नहीं अपनाएगी, तो पिछड़ जाएगी. उर्दू को किसी बाहरी दुश्मन से नहीं, बल्कि बदलाव से इनकार करने वाले रवैये से खतरा है. इसी दूरदर्शिता के साथ पुराने किताबत सेंटरों को बंद करके उर्दू कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटरों में बदला गया.

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​इनपेज और फॉन्ट में तकनीकी सुधार का संघर्ष

शाहिद सिद्दीकी ने बताया कि शुरुआती दौर में कंप्यूटर पर उर्दू फॉन्ट (जैसे शाहकार और इनपेज) के इस्तेमाल में कई व्यावहारिक चुनौतियां थीं. लाइनों के बीच अत्यधिक अंतर और अक्षरों के एक-दूसरे से टकराने की समस्या को हल करने के लिए नस्तालीक़ के पारंपरिक नियमों में तब्दीली कराई गई. काफ के मरकज़ को झुकाने और नुक्तों का आकार सही करने जैसे बदलाव किए गए ताकि उर्दू में अखबारों और लेखों की छपाई आधुनिक मानकों के अनुसार हो सके. बदलाव का यही नियम उर्दू को तकनीक के इस नए दौर में सुरक्षित रखेगा.

भारत एक्सप्रेस



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