प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 19 सितंबर को ‘पर्यावरण और जलवायु की गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर आयोजित होने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करने वाले हैं. इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी द्वारा किया जा रहा है.
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि कुल 17 देशों के जज और न्यायिक प्रतिनिधि हिस्सा लेने आ रहे हैं. इसके अलावा हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला अदालतों के सम्मानित जज, पर्यावरण मामलों के बड़े विशेषज्ञ, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी इस मंथन का हिस्सा बनेंगे.
कार्यक्रम में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया जाएगा कि पर्यावरण से जुड़े कानून सिर्फ कागजों पर न रहें, बल्कि जमीन पर भी सख्ती से लागू हों. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि नीतियां तो बहुत अच्छी बनती हैं, लेकिन उन्हें लागू करने में कई तरह की कमियां रह जाती हैं. यह सम्मेलन इन्हीं कमियों को दूर करने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक बेहतरीन जरिया साबित होगा.
स्वच्छ हवा कोई लग्जरी नहीं, हमारा बुनियादी हक है
हाल ही में ‘नीले आसमान के लिए स्वच्छ हवा के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के मौके पर एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने एक बहुत ही गहरी बात कही थी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि साफ हवा कोई विलासिता या शौक की चीज नहीं है, बल्कि हर इंसान का बुनियादी अधिकार है. उन्होंने यह भी समझाया कि प्रदूषण किसी देश या शहर की सरहद देखकर नहीं आता, इसलिए इससे लड़ने के लिए सबको मिलकर सीमाएं लांघकर सोचना होगा.
जस्टिस श्रीवास्तव का मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक-साथ चल सकते हैं. ये एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि बेहतर जिंदगी के लिए दोनों का तालमेल बहुत जरूरी है. उन्होंने लोकल बॉडीज और आम नागरिकों से अपील की है कि प्रदूषण को जड़ से खत्म करने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए और हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझे, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां एक खुली और साफ हवा में सांस ले सकें.
सरकार का वैज्ञानिक और साझा दृष्टिकोण
इस दिशा में आगे बढ़ते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय भी लगातार ठोस कदम उठा रहा है. पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार का कहना है कि सरकार पीएम मोदी के विजन के मुताबिक ही प्रदूषण से निपटने के लिए एक वैज्ञानिक और पूरी तरह समन्वित तरीका अपना रही है. इस दौरान ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ के तहत बेहतरीन काम करने वाले शहरों और वार्डों को सम्मानित भी किया गया है, ताकि दूसरों को भी इससे प्रेरणा मिल सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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