Imran Khan Pakistan News: पाकिस्तान में निर्वाचित हुकूमत और ताकतवर सैन्य प्रतिष्ठान के बीच सत्ता के टकराव का पुराना इतिहास एक बार फिर सड़कों पर दहकने को तैयार है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की ओर से 27 सितंबर को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन ने शहबाज सरकार और सेना की नींद उड़ा दी है. सालों से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सलामती और उनकी तत्काल रिहाई की मांग को लेकर पीटीआई ने आर-पार की जंग छेड़ने की तैयारी कर ली है. पार्टी का दावा है कि इस प्रदर्शन के जरिए मौजूदा हुकूमत की सारी कलई खुल जाएगी.
प्रदर्शन से पहले इमरान की 3 बहनों को हिरासत में लिया
सरकार के भीतर इस प्रदर्शन को लेकर किस कदर खौफ है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विरोध शुरू होने से पहले ही इमरान खान के परिवार पर शिकंजा कस दिया गया है. लाहौर प्रशासन ने पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO) ऑर्डिनेंस 1960 के तहत इमरान खान की तीनों बहनों—उजमा खान, नोरीन नियाजी और अलीमा खान को 30 दिनों के लिए एहतियातन हिरासत में भेज दिया है. अधिकारियों ने आदेश में उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया है.

पाक सेना और राजनीति के बीच फंसा इस्लामी मुल्क
सामाजिक नीति विशेषज्ञ क्रिसौला एस्टरियाडू ने प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी में प्रकाशित एक लेख में रेखांकित किया है कि 1977 के सैन्य तख्तापलट के करीब पांच दशक बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान इस सवाल का हल नहीं निकाल पाया है कि मुल्क की अंतिम राजनीतिक ताकत किसके पास है—जनता द्वारा चुनी गई संसद के पास या फिर सैन्य जनरलों के पास.
इमरान खान का मौजूदा मामला उसी अस्थिर राजनीतिक व्यवस्था का एक बड़ा लक्षण है. विश्लेषकों का मानना है कि 2018 में जब इमरान खान सत्ता में आए थे, तब उन्हें सेना का करीबी माना गया था, लेकिन बाद में सैन्य नेतृत्व से मतभेद होने पर सत्ता संतुलन बिगड़ गया और वे सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए.
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सेना प्रमुख असीम मुनीर का बढ़ा प्रभाव, सैन्य पुनर्गठन
पाकिस्तान के मौजूदा सेना प्रमुख असीम मुनीर के दौर में सेना की पकड़ शासन व्यवस्था पर और ज्यादा मजबूत हुई है. मई 2025 में मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद वह अयूब खान के बाद इस पद तक पहुंचने वाले मुल्क के दूसरे सैन्य अधिकारी बने. इसके अलावा नवंबर 2025 में 27वें संविधान संशोधन के जरिए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का नया पद सृजित कर मुनीर को यह जिम्मेदारी भी सौंप दी गई.
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संविधान और लोकतंत्र की बहाली का नारा: पीटीआई
पीटीआई नेताओं हारिस तौरो, शाहिद अनवर, रियाजुर रहमान और अधिवक्ता सज्जाद अहमद का कहना है कि 27 सितंबर का प्रदर्शन केवल इमरान खान की निजी रिहाई का मसला नहीं है, बल्कि यह मुल्क में कानून के शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका और संविधान की सर्वोच्चता को बहाल करने की निर्णायक लड़ाई है. नेताओं का आरोप है कि मौजूदा सत्ता ने चुनावी संस्थाओं को कमजोर कर देश को गंभीर आर्थिक और राजनीतिक बर्बादी की कगार पर धकेल दिया है.
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