राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को गुजरात के वडोदरा में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागृति’ (Spiritual Awakening for World Renewal) का औपचारिक शुभारंभ किया. इसके साथ ही उन्होंने वडोदरा में नवनिर्मित अत्याधुनिक रिट्रीट सेंटर ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ का उद्घाटन किया. समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक जन्मस्थली नडियाद (गुजरात) से जुड़े ब्रह्माकुमारीज के विशेष कार्यक्रम ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया.
‘केवल आर्थिक विकास नहीं, मानवीय विकास की भी जरूरत’
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आधुनिक विकास की दिशा और आध्यात्मिक चेतना के संतुलन पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा:
“आज के दौर में केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानवीय विकास की भी उतनी ही आवश्यकता है. हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो केवल बुद्धि का विकास न करे, बल्कि विवेक को भी जाग्रत करे. हमें ऐसी प्रगति की दरकार है जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हो. हमें ऐसी शक्ति अर्जित करनी चाहिए जो दूसरों पर नियंत्रण करने के बजाय स्वयं पर नियंत्रण करना सिखाए, और ऐसी आध्यात्मिकता चाहिए जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हो.”
राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारीज संस्था की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने राजयोग ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत रूपांतरण और विश्व नवीनीकरण का पावन संदेश भारत के कोने-कोने के साथ-साथ विश्व भर में पहुंचाया है.
ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस बनेगा शांति और सद्भाव का केंद्र
राष्ट्रपति ने कहा कि मनुष्य के भीतर सदैव सकारात्मक बदलाव की अपार संभावनाएं निहित होती हैं. यदि किसी व्यक्ति में यह दृढ़ विश्वास जग जाए कि अपने विचारों और कर्मों को परिष्कृत कर जीवन को बदला जा सकता है, तो उसमें आशा और आत्मसम्मान लौट आता है. ऐसा व्यक्ति केवल स्वयं नहीं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन जाता है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वडोदरा का यह ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ समाज के सभी वर्गों के लोगों को शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव के सूत्र में पिरोने का सशक्त केंद्र बनेगा.
युवाओं की शक्ति के जागरण से बनेगा विकसित भारत
नडियाद के युवा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब देश का युवा अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को सकारात्मक दिशा देता है, तो उसका व्यापक प्रभाव परिवार, कार्यक्षेत्र, समाज और अंततः संपूर्ण राष्ट्र पर पड़ता है. आंतरिक शक्ति का जागरण केवल व्यक्तिगत उन्नति का मार्ग नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक अत्यंत गहरी और मौलिक प्रक्रिया है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर, शांतिप्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनाकर सशक्त करना समाज के हर वर्ग का सामूहिक दायित्व है. उन्होंने आह्वान किया कि हमारा साझा लक्ष्य एक ऐसे भारत का निर्माण होना चाहिए जो आर्थिक रूप से समृद्ध, वैज्ञानिक रूप से उन्नत, सामाजिक रूप से समावेशी और आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह जागृत हो.
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