सुप्रीम कोर्ट ने देश के बड़े बैंकों के लोन और एसेट रिकंस्ट्रक्शन (ARC) मामलों की एसएफआईओ, सीबीआई, ईडी और सेबी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों (कंपनियों और पक्षों) की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ता की साख (Locus Standi) और उसकी नीयत पर गंभीर सवाल उठाए.
याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दलील दी कि इस मामले में देश के बड़े वकीलों का शामिल होना यह बताता है कि यह नेक्सस (गठजोड़) कितना बड़ा है. इससे पहले, जेकेएम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने भी याचिका का विरोध करते हुए इसे खारिज करने की मांग की थी.
बैंकों के तौर-तरीकों पर SC की कड़ी नाराजगी
पूर्व की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने लोन सेटलमेंट के तौर-तरीकों पर गहरी नाराजगी जताते हुए तीखी टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि यह बैंकों, एआरसी और कर्जदारों के बीच एक ऐसा गठजोड़ बन गया है जहाँ जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को लापरवाही से बड़े-बड़े लोन के रूप में बांट दिया जाता है, और बाद में उस पैसे की वसूली के लिए कोई भी गंभीर प्रयास नहीं किया जाता. अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस तरह का रवैया किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.
याचिका में क्या थे आरोप?
शेल कंपनियों में पैसे ट्रांसफर करने का दावा: याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने एक फॉरेंसिक ऑडिट का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया था कि नोएडा स्थित ‘जेकेएम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स’ पर सरकारी बैंकों का करीब 1,537 करोड़ रुपये का बकाया लोन था. ऑडिट के मुताबिक, बैंकों से लिए गए 912 करोड़ रुपये के लोन में से 902 करोड़ से अधिक की राशि को कथित तौर पर फर्जी तरीके से शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया था.
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कम कीमत पर लोन सेटलमेंट: याचिकाकर्ता का आरोप था कि इतने बड़े घोटाले और अनियमितताओं के बावजूद बैंकों ने इसे ‘धोखाधड़ी’ घोषित करने के बजाय उस कर्ज को एआरसी कंपनियों के माध्यम से मात्र 73.50 करोड़ रुपये में ही निपटा दिया. याचिका में दावा किया गया कि इस पूरी प्रक्रिया से सरकारी बैंकों और सार्वजनिक धन को 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान पहुंचाया गया है.
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