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IRDAI के एक ड्राफ्ट से पॉलिसीबाजार को बड़ा झटका, एक दिन में ₹31 हजार करोड़ की मार्केट वैल्यू साफ

Policybazaar share crash: IRDAI के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन पर प्रस्तावित नए नियमों से PB Fintech के शेयर में 36% की गिरावट आई. कंपनी की मार्केट वैल्यू एक दिन में करीब ₹31,400 करोड़ घट गई.

Policybazaar share crash

पॉलिसीबाजार के शेयरों में भारी गिरावट

Edited by Sahil Singh

Policybazaar share crash: सोचिए, किसी कंपनी के खिलाफ न कोई बड़ा घोटाला सामने आया, न उसका सर्वर हैक हुआ और न ही किसी बड़े अधिकारी ने इस्तीफा दिया. इसके बावजूद एक ही कारोबारी दिन में उसकी करीब ₹31,000 करोड़ की मार्केट वैल्यू खत्म हो जाए. गुरुवार को शेयर बाजार में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला.

पॉलिसीबाजार इंडिया की पैरेंट कंपनी पीबी फिनटेक के शेयरों में 24 सितंबर को करीब 36 फीसदी की भारी गिरावट आई. शेयर ₹1,886.30 के पिछले बंद भाव से गिरकर ₹1,207.20 पर बंद हुआ. इस गिरावट के साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹31,400 करोड़ घट गया.

इसके पीछे वजह थी इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) का एक कंसल्टेशन पेपर, जिसमें इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन यानी बीमा बेचने और उसकी बिक्री पर मिलने वाले कमीशन के मौजूदा ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है.

आखिर पॉलिसीबाजार का कारोबार है क्या?

पॉलिसीबाजार (Policybazaar) को आम लोग मुख्य रूप से ऐसी वेबसाइट या ऐप के तौर पर जानते हैं, जहां अलग-अलग कंपनियों की बीमा पॉलिसियों की तुलना करके उन्हें खरीदा जा सकता है. लेकिन इसके पीछे का कारोबार थोड़ा अलग है. पीबी फिनटेक (PB Fintech) खुद बीमा कंपनी नहीं है. यह ग्राहकों और बीमा कंपनियों के बीच एक डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म की तरह काम करती है. ग्राहक जब इसके जरिए पॉलिसी खरीदता है तो बीमा कंपनी से प्लेटफॉर्म को कमीशन मिलता है.

यही मॉडल इसे काफी हद तक ‘एसेट-लाइट’ बिजनेस बनाता है. कंपनी को खुद बीमा दावों का भुगतान नहीं करना पड़ता और न ही बीमा कंपनी की तरह बड़े स्तर पर पूंजी जोखिम उठाना पड़ता है. लेकिन इस मॉडल की एक बड़ी कमजोरी भी है. कमाई का एक अहम हिस्सा उस कमीशन पर निर्भर करता है, जिसे रेगुलेशन बदलकर प्रभावित किया जा सकता है.

IRDAI के प्रस्ताव ने क्यों मचा दी हलचल?

23 सितंबर को IRDAI ने ‘Recalibrating Economics of Insurance Distribution’ नाम से कंसल्टेशन पेपर जारी किया. इसमें बीमा कंपनियों के खर्च और डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिए जाने वाले कमीशन से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है.

प्रस्ताव में अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन पर ज्यादा सख्त सीमाएं लगाने की बात है. हेल्थ, मोटर और लाइफ इंश्योरेंस समेत कई कैटेगरी इसके दायरे में आ सकती हैं. यही बात बाजार को सबसे ज्यादा परेशान कर गई. ब्रोकरेज फर्मों ने तुरंत यह गणना शुरू कर दी कि अगर प्रस्ताव मौजूदा रूप में लागू होते हैं तो ऑनलाइन इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई पर कितना असर पड़ सकता है.

जैफरीज के आकलन के मुताबिक, नई पॉलिसियों पर कमीशन में 10 फीसदी की कमी पीबी फिनटेक और टर्टलमिंट की कमाई को करीब 10-12 फीसदी तक प्रभावित कर सकती है. वहीं अन्य विश्लेषकों ने कुछ इंश्योरेंस कैटेगरी में संभावित असर इससे भी ज्यादा बताया है.

PB Fintech के शेयर में ऐसा क्या हुआ?

गुरुवार की शुरुआत से ही पीबी फिनटेक पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया. शेयर ₹1,697.70 पर खुला और दिनभर लगातार गिरता रहा. आखिरकार शेयर ₹1,207.20 पर बंद हुआ, जो एक दिन पहले के मुकाबले 36 फीसदी की गिरावट थी. यह कंपनी के शेयर का 2021 में लिस्टिंग के बाद सबसे बड़ा एक-दिन का नुकसान बताया गया है.

कारोबार के दौरान कई बार शेयर अपनी निचली प्राइस बैंड पर पहुंचा. बाजार में खरीदारों की तुलना में बेचने वालों का दबाव इतना ज्यादा था कि गिरावट लगातार बढ़ती चली गई. मार्केट कैपिटलाइजेशन की बात करें तो बुधवार के बंद भाव से गुरुवार के बंद भाव तक कंपनी की वैल्यू में करीब 31,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई.

Turtlemint भी नहीं बच पाया

इसका असर सिर्फ पॉलिसीबाजार तक सीमित नहीं रहा. इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म टर्टलमिंट की पैरेंट कंपनी टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस (Turtlemint Fintech Solutions) के शेयर भी 20 फीसदी के निचले सर्किट पर पहुंच गए.

शेयर बुधवार को ₹136.30 पर बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार को सीधे ₹109.04 पर आ गया और फिर पूरे कारोबारी सत्र में इसी निचले सर्किट पर फंसा रहा. इससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण में करीब 800 करोड़ रुपये की कमी आई. जून 2026 में लिस्टिंग के बाद यह शेयर का सबसे निचला स्तर भी रहा.

एक ही नियम से किसी को नुकसान, किसी को फायदा

इस पूरे घटनाक्रम का दिलचस्प पहलू यह है कि प्रस्तावित नियमों का असर हर कंपनी पर एक जैसा नहीं होगा. पॉलिसीबाजार जैसे डिस्ट्रीब्यूटर के लिए कमीशन कम होना सीधे उसकी कमाई पर असर डाल सकता है. वहीं दूसरी तरफ बीमा कंपनियों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन एक खर्च होता है. इसलिए कमीशन पर नियंत्रण बढ़ने से कुछ बीमा कंपनियों की लागत घट सकती है.

यानी बीमा कारोबार की चेन में आप किस जगह खड़े हैं, उसी के हिसाब से एक ही रेगुलेशन का असर बिल्कुल अलग हो सकता है. इसी वजह से गुरुवार को केवल पीबी फिनटेक और टर्टलमिंट ही नहीं, बल्कि कई बैंक, NBFC और इंश्योरेंस कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे. रॉयटर्स के मुताबिक, बीमा डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी आय वाले कई वित्तीय शेयरों में बिकवाली देखने को मिली.

नितिन कामथ ने भी उठाया रेगुलेटरी रिस्क का मुद्दा

इस गिरावट के बीच जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ (Nithin Kamath) ने सोशल मीडिया पर रेगुलेटेड कारोबारों में मौजूद रेगुलेटरी रिस्क की ओर ध्यान दिलाया. उनका तर्क था कि ऐसे कारोबारों में नियम बदलने का असर अचानक और काफी बड़ा हो सकता है. उन्होंने इसी संदर्भ में ब्रोकिंग सेक्टर का उदाहरण भी दिया, जहां समय-समय पर F&O, मार्जिन और क्लाइंट फंड से जुड़े नियमों में बदलाव ने कारोबार की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है.

लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है

यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. IRDAI का यह अभी प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं. कंसल्टेशन पेपर पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं और प्रतिक्रिया देने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर है. इसके बाद मिले सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया जाएगा.

इसका मतलब यह है कि बाजार ने फिलहाल उन प्रस्तावों के संभावित असर को कीमतों में शामिल करना शुरू कर दिया है, लेकिन अंतिम नियम आने तक तस्वीर बदल भी सकती है. कमीशन की सीमा कितनी होगी, नए नियम कब से लागू होंगे और कंपनियों को बदलाव के लिए कितना समय मिलेगा, इन सवालों के जवाब आगे की प्रक्रिया में साफ होंगे.


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बाजार ने एक दिन में क्या संदेश दिया?

पीबी फिनटेक की एक दिन में करीब 31,000 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू का कम होना सिर्फ शेयर बाजार की कहानी नहीं है. यह बताता है कि रेगुलेटेड कारोबार में नियमों का महत्व कितना बड़ा है. किसी कंपनी के पास मजबूत ब्रांड, लाखों ग्राहक और तेजी से बढ़ता डिजिटल कारोबार हो सकता है, लेकिन अगर उसके रेवेन्यू मॉडल का बड़ा हिस्सा रेगुलेटर द्वारा तय किए जाने वाले कमीशन पर निर्भर है, तो नियमों में बदलाव उसकी वैल्यूएशन को बहुत तेजी से प्रभावित कर सकता है.

फिलहाल बाजार ने IRDAI के प्रस्ताव को लेकर काफी सख्त प्रतिक्रिया दी है. लेकिन अंतिम नियम अभी बाकी हैं. इसलिए गुरुवार को हुई गिरावट को इस पूरे मामले का आखिरी अध्याय मानना जल्दबाजी होगी. असली तस्वीर तब सामने आएगी, जब कंसल्टेशन प्रक्रिया पूरी होगी और नए नियमों का अंतिम स्वरूप तय होगा.

-भारत एक्सप्रेस



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