Sanjay Mishra Autobiography: राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज अभिनेता संजय मिश्रा अब अपने जीवन के अनुभवों, अनकहे किस्सों और संघर्षों को शब्दों में पिरोने जा रहे हैं. उन्होंने अपनी पहली आत्मकथा ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ के प्रकाशन की घोषणा की है. पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक अगले वर्ष जनवरी में आयोजित होने वाले विश्व पुस्तक मेले में पाठकों के बीच आएगी.
दिग्गज अभिनेता संजय मिश्रा अपनी पहली आत्मकथा ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ के जरिए लेखकीय यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं. पेंगुइन स्वदेश से प्रकाशित होने वाली यह पुस्तक उनके व्यक्तिगत जीवन, संघर्षों और राष्ट्रीय पुरस्कार तक के सफर को सहज और आत्मीय शैली में प्रस्तुत करेगी.
पेंगुइन स्वदेश से आएगी पहली किताब
संजय मिश्रा की यह आत्मकथा पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के हिंदी इम्प्रिंट ‘पेंगुइन स्वदेश’ से प्रकाशित होगी. जनवरी में विश्व पुस्तक मेले के अवसर पर इसका औपचारिक विमोचन किया जाएगा. इस किताब में वे पर्दे के पीछे की दुनिया, अपने व्यक्तिगत अनुभवों और जीवन से मिली सीखों को पाठकों के साथ खुलकर साझा करेंगे.
पिता को समर्पित किया राष्ट्रीय पुरस्कार और किताब
अभिनेता ने अपने राष्ट्रीय पुरस्कार (रजत कमल) और इस नई पुस्तक को अपने दिवंगत पिता को समर्पित किया. भावुक होते हुए संजय मिश्रा ने कहा कि जब मंच पर उन्हें पुरस्कार के लिए पुकारा गया, तो उनके पिता उनकी आंखों में आंसू बनकर मौजूद थे. उन्होंने बेहद सहज अंदाज में कहा, ‘मैं ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं… फिर भी लिखूंगा और आप पढ़ेंगे.’
पेंगुइन स्वदेश ने जताया हर्ष
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की प्रकाशक वैशाली माथुर ने बताया कि संजय मिश्रा के पिता ने भी बनारस पर पेंगुइन के लिए एक पुस्तक लिखी थी. अब संजय मिश्रा की यह लेखकीय शुरुआत संस्था के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने उम्मीद जताई कि संजय मिश्रा की सहज भाषा और जीवन के अनुभव सभी वर्गों के पाठकों के लिए बेहद आत्मीय व प्रेरक साबित होंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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