CBSE Name DOB Correction Rules 2026
CBSE Name DOB Correction Rules 2026: अगर आपका बच्चा CBSE बोर्ड से पढ़ाई कर रहा है, तो यह खबर माता-पिता और छात्रों के लिए बेहद जरूरी है. नाम की स्पेलिंग, जन्म तिथि (DOB) या माता-पिता के नाम में गलती होने पर अब रिजल्ट के बाद सुधार कराने की प्रक्रिया आसान नहीं होगी. 23 सितंबर 2026 को जारी एक सर्कुलर में CBSE ने मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया है कि जरूरी और प्रमाणित दस्तावेजों के बिना भेजे गए सुधार आवेदनों को खारिज किया जा सकता है.
दस्तावेज पूरे नहीं तो आवेदन हो सकता है रिजेक्ट
CBSE के अनुसार, रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों की डेमोग्राफिक डिटेल्स में सुधार से जुड़े कई आवेदन बोर्ड के पास पहुंचते हैं. इनमें कई बार जरूरी दस्तावेज अधूरे होते हैं, पुराने स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होते या जमा किए गए दस्तावेज स्पष्ट नहीं होते. बोर्ड ने इसी तरह की समस्याओं को देखते हुए स्कूलों को दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड को सही रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा है.
9वीं से 12वीं तक कई बार मिलती है जानकारी जांचने की सुविधा
CBSE के मुताबिक, छात्रों और उनके अभिभावकों को 9वीं से 12वीं कक्षा के दौरान अपनी जानकारी जांचने और जरूरी सुधार कराने के कई अवसर मिलते हैं. 9वीं कक्षा में रजिस्ट्रेशन के दौरान तैयार रिकॉर्ड की जानकारी अभिभावकों को दिखाई जाती है. इसके बाद 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा से पहले List of Candidates (LOC) में दर्ज जानकारी को सत्यापित कराया जाता है. एडमिट कार्ड जारी होने से पहले भी नाम, जन्म तिथि और अन्य विवरण जांचने का मौका मिलता है. 11वीं में रजिस्ट्रेशन और 12वीं में परीक्षा फॉर्म भरते समय भी डिटेल्स को दोबारा सत्यापित किया जाता है.
स्कूल के जरिए ही भेजना होगा करेक्शन आवेदन
CBSE की गाइडलाइंस के अनुसार, छात्रों या अभिभावकों को डेमोग्राफिक डिटेल्स में सुधार के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा. स्कूल को छात्र के एडमिशन फॉर्म, स्कॉलर रजिस्टर, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और पिछले स्कूलों के प्रमाणित रिकॉर्ड की जांच करनी होगी. सुधार से जुड़े आवेदन स्कूल के माध्यम से बोर्ड को भेजे जाएंगे. इसलिए अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे स्कूल की ओर से दिए जाने वाले रजिस्ट्रेशन कार्ड, LOC और एडमिट कार्ड में दर्ज जानकारी को ध्यान से जांचें.
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एक छोटी गलती भविष्य में बन सकती है बड़ी परेशानी
नाम की स्पेलिंग, स्पेसिंग, जन्म तिथि या माता-पिता के नाम में मामूली गलती भी आगे चलकर दस्तावेजों के सत्यापन में परेशानी पैदा कर सकती है. इसलिए अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि बच्चे के स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज प्रत्येक जानकारी को समय रहते जांच लें. CBSE के इस निर्देश के बाद रिजल्ट आने के बाद सुधार कराने पर निर्भर रहने के बजाय छात्रों और अभिभावकों के लिए शुरुआती स्तर पर ही रिकॉर्ड सही कराना महत्वपूर्ण हो गया है.
भारत एक्सप्रेस
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