भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन शोषण के आरोपों से बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब तलब किया है. विशेष न्यायाधीश दिग्विजय सिंह की अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को करेगी.
क्या है पूरा मामला और पहलवानों की अपील?
महिला पहलवानों की ओर से मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील (रिवीजन याचिका) दायर की गई है, जिसमें सबूतों के अभाव में बृजभूषण शरण सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था. पहलवानों ने अपनी याचिका में सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है. याचिका में 3 अगस्त को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) द्वारा दिए गए फैसले को लेकर निम्नलिखित मुख्य आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं.
चुनिंदा और गलत मूल्यांकन: याचिका में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का यह फैसला रिकॉर्ड में मौजूद पुख्ता सबूतों के बजाय चुनिंदा व्याख्या और गलत आकलन पर आधारित है.
कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी: आरोप लगाया गया है कि फैसला देते समय स्थापित कानूनी सिद्धांतों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और अदालत का यह निर्णय पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच (Stereotypical Mindset) पर आधारित है.
बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की मांग: महिला पहलवानों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने अदालत में दोनों आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की है.
बचाव पक्ष का पक्ष: इससे पहले 30 जून को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर की ओर से पेश वकील राजीव मोहन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें मनगढ़ंत और केवल बदनाम करने की नीयत से लगाए गए आरोप बताया था, और दोनों को बरी करने की मांग की थी. मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद थे.
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली पुलिस ने महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर पूर्व सांसद के खिलाफ 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इस चार्जशीट में चार राज्यों के कम से कम 22 गवाहों (जिनमें पहलवान, एक रेफरी, एक कोच और एक फिजियोथेरेपिस्ट शामिल हैं) के बयानों का उल्लेख किया गया था, जिन्होंने आरोपों की पुष्टि की थी.
ये भी पढ़ें: दिल्ली-एनसीआर में रेप के मामले: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, निर्भया केस से की तुलना
पुलिस ने 15 जून 2023 को सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (शील भंग करना), 354ए (यौन उत्पीड़न/टिप्पणी), 354डी (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया था. कोर्ट ने 10 मई 2024 को आरोप तय करने के आदेश दिए थे और 11 जुलाई 2025 को मुकदमा शुरू करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद दोनों पक्षों की लंबी जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


