झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) जांच की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए एक दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया है. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान जस्टिस वी. मोहना ने अदालत को अवगत कराया कि इस मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से वह पहले पेश हो चुकी हैं, जिसके मद्देनजर मामले को किसी अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना उचित है. अब इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 5 अक्टूबर को दूसरी बेंच द्वारा की जाएगी.
याचिकाकर्ता की मांग और पिछली सुनवाई का घटनाक्रम
दंडात्मक कार्रवाई पर रोक और एफआईआर की जानकारी: सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सत्यम सिंह राजपूत ने कोर्ट से मांग की कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक (Punitive) कार्रवाई न की जाए. साथ ही, उन्होंने इस मामले में दर्ज सभी एफआईआर से संबंधित विस्तृत जानकारी तलब करने का भी अनुरोध किया.
इससे पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील मनन मिश्रा ने कोर्ट को बताया था कि झारखंड में इस परीक्षा को लेकर छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा था कि क्या राज्य में न्यायिक सेवा परीक्षा (Judicial Service Exam) भी लोक सेवा आयोग द्वारा ही आयोजित की जाती है? हालांकि कोर्ट ने माना कि यह मुद्दा बेहद गंभीर है.
यह जनहित याचिका हरिशरण देवगन द्वारा दायर की गई है, जिसमें 19 अप्रैल 2026 को आयोजित ‘झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा 2025’ की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिका में मांग की गई है कि इस पूरी परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या विशेष जांच दल (SIT) से कराई जानी चाहिए.
परीक्षा की श्रृंखला और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में कहा गया है कि इस विवाद को केवल किसी एक अभ्यर्थी या एक केंद्र तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पूरे दायरे की गहन जांच होनी चाहिए. याचिका में ओएमआर (OMR) शीट, प्रश्नपत्र, आंसर की, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और परीक्षा केंद्रों से जुड़े सभी अभिलेखों व रिकॉर्ड को पूरी तरह सुरक्षित रखने के निर्देश देने की मांग की गई है. छपाई से लेकर परिवहन तक की जांच: याचिका के अनुसार, जांच का दायरा प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी छपाई, सुरक्षित भंडारण, परिवहन से लेकर परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचने की पूरी प्रक्रिया तक होना चाहिए.
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गौरतलब है कि इस परीक्षा के परिणाम 2 जुलाई 2026 को घोषित किए गए थे और इसके जरिए कुल 103 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं. हालांकि, बढ़ते विवाद और कानूनी पेचीदगियों के बीच जेपीएससी ने अगले आदेश तक मुख्य (Mains) परीक्षा को स्थगित कर दिया है. दूसरी ओर, झारखंड हाईकोर्ट ने भी 20 अगस्त को जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं के जरिए की गई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा रखी है.
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