सुप्रीम कोर्ट ने चीनी, फैट और नमक जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले पोषक तत्वों की अत्यधिक मात्रा वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर सामने की तरफ चेतावनी वाले न्यूट्रिशन लेबल (Front-of-Pack Nutrition Labelling – FOPNL) को अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग वाली याचिका पर सभी पक्षों की लंबी जिरह के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की.
कड़ी टिप्पणियां के साथ FSSAI से सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अब तक के रवैये और समय लगाने पर कड़ी नाराजगी जताई. जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI के वकील से तीखे सवाल पूछते हुए कहा-
“हम आपके अब तक के काम और आपकी पहल की सराहना करते हैं, लेकिन जो हम हासिल करना चाहते हैं और जहां पहुंचना चाहते हैं, उसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है. अब हम जो आदेश देंगे, वह आप पर लागू होगा और हमें पूरी उम्मीद है कि आप इसे पूरी ईमानदारी से लागू करेंगे.”
कोर्ट ने FSSAI के नए प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नियमों को लागू करने में एक साल तक ‘स्वैच्छिक पालन’ (Voluntary Compliance) का प्रावधान क्यों रखा गया है? आपको इतना समय क्यों चाहिए? आप सुनवाई और आपत्तियां मांगने की प्रक्रिया फिर से क्यों शुरू करना चाहते हैं? कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि-
जब इसकी शुरुआत 2022 में की गई थी, तो पिछले चार वर्षों में क्या किया गया? जब हम नागरिकों के स्वास्थ्य के मुद्दे को लेकर इतने गंभीर और चिंतित हैं, तो आप इतना समय क्यों बर्बाद करना चाहते हैं?
FSSAI का नया प्रस्ताव
FSSAI की ओर से हाल ही में दाखिल अतिरिक्त हलफनामे में स्पष्ट किया गया था कि वह पहले प्रस्तावित दो चरणों के बजाय अब एक ही चरण में ‘ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग’ को लागू करने की योजना बना रहा है, जिसके ड्राफ्ट नियमों और अधिसूचना को अंतिम रूप देने में लगभग 4 महीने का समय लग जाएगा.
एनजीओ का विरोध और नए फ्रेमवर्क का नियम
दूसरी ओर, ‘3S and Our Health Society’ नामक एनजीओ ने FSSAI के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि मामले को अनावश्यक रूप से टाला और लटकाया जा रहा है. इस नए प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत, तय सीमा से अधिक मात्रा में नमक, चीनी या सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) वाले पैकेटबंद खाने-पीने के सामान के पैकेट के सामने की तरफ लाल रंग का चेतावनी निशान (Red Warning Label) लगाना अनिवार्य होगा.
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में स्पष्ट और सख्त समयसीमा मांगे जाने के बाद FSSAI को यह कदम उठाना पड़ा है. इस फैसले के लागू होने से देश भर के 100 करोड़ रुपये से अधिक के उपभोक्ता बाजार और हजारों बड़ी खाद्य निर्माण कंपनियां प्रभावित होंगी.
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