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जलमग्न हुआ चमत्कारी शिव धाम, कमर तक पानी में भी नहीं डिगी आस्था, मगरमच्छ का खतरा

UP News: लखीमपुर खीरी में लगातार बारिश और तेज हवाओं से हालात बिगड़ गए हैं. नदियों का जलस्तर बढ़ने से लिलौटीनाथ मंदिर का रास्ता डूब गया है और मगरमच्छ का खतरा भी मंडरा रहा है.

Flood-like situation in Lakhimpur Kheri due to rain.

लखीमपुर खीरी में बारिश से बाढ़ जैसे हालात

UP News: लखीमपुर खीरी जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने हालात बिगाड़ दिए हैं. नदियों का पानी तेजी से ऊपर चढ़ रहा है और कई जगहों पर सड़कों से लेकर गलियों तक जलभराव हो गया है.

लिलौटीनाथ मंदिर का रास्ता डूबा

महाभारत कालीन माने जाने वाले प्राचीन लिलौटीनाथ मंदिर तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह पानी में डूब गया है. श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को मंदिर तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई जगह पानी कमर से ऊपर तक भर गया है, जिससे आवाजाही लगभग ठप हो गई है.

मगरमच्छ का खतरा भी मंडरा रहा

कंडवा नदी में कुछ दिन पहले मगरमच्छ देखे जाने की खबर ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने के साथ मगरमच्छ का खतरा भी ज्यादा हो गया है. लोग नदी किनारे जाने से बच रहे हैं और बच्चों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है.

तेज हवाओं से बिजली बाधित

तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ गिर गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति ठप हो गई है. गांवों में अंधेरा छा गया है और लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में परेशानी हो रही है.

श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार

हालात खराब होने के बावजूद कुछ श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा करते नजर आए. महंत अमित गिरी ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर मंदिर तक न जाएं. उन्होंने प्रशासन से राहत और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है ताकि श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को सुरक्षित रखा जा सके.

महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास

यूपी के लखीमपुर खीरी में स्थित लिलौटी नाथ मंदिर बहुत पुराना और प्रसिद्ध शिव धाम है. मान्यता है कि इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है. कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर यहां इस दिव्य शिवलिंग की स्थापना की थी.

700 साल पहले मिला था शिवलिंग

लोक कथाओं के मुताबिक करीब 700 साल पहले महेवा स्टेट के राजा दुनिया सिंह जंगल में शिकार करने आए थे. तभी एक तपस्वी संत के कहने पर उन्हें जमीन में दबा हुआ ये शिवलिंग मिला और फिर उन्होंने यहां शानदार मंदिर बनवाया.

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रोज पूजा करने आते हैं अश्वत्थामा

यहां का शिवलिंग बहुत चमत्कारी है. मान्यता है कि ये दिन में तीन बार रंग बदलता है. सुबह काला, दोपहर में भूरा और रात में हल्का सफेद दिखता है. लोगों का मानना है कि आज भी अश्वत्थामा रोज सुबह मंदिर का कपाट खुलने से पहले आकर गुप्त रूप से शिव जी की पूजा करते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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