एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपराध से अर्जित संपत्तियों की वसूली के लिए काम करने वाले एसेट रिकवरी इंटर-एजेंसी नेटवर्क-एशिया पैसिफिक (ARIN-AP) की 11वीं वार्षिक आम बैठक नई दिल्ली में शुरू हुई. भारत पहली बार इस वार्षिक बैठक की मेजबानी कर रहा है. बैठक का आयोजन प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मेजबानी में हो रहा है. भारत वर्ष 2026 में ARIN-AP का अध्यक्ष है. बैठक 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगी.
बैठक में ARIN-AP के सदस्य देशों और पर्यवेक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न भारतीय एजेंसियों के अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं. वार्षिक बैठक से पहले स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक हुई. उद्घाटन सत्र को प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक और दक्षिण कोरिया के सुप्रीम प्रॉसीक्यूटर्स ऑफिस (SPO) के निदेशक ने संबोधित किया. जबकि दक्षिण कोरिया का SPO ARIN-AP के सचिवालय की जिम्मेदारी संभालता है.
क्या है ARIN-AP
ARIN-AP एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपराध से अर्जित रकम और संपत्तियों की पहचान, जब्ती और वापसी के लिए कानून प्रवर्तन और न्यायिक अधिकारियों के बीच सहयोग का एक अनौपचारिक नेटवर्क है. इसकी शुरुआत नवंबर 2013 में दक्षिण कोरिया में हुई थी. यह यूरोप के CARIN नेटवर्क की तर्ज पर बनाया गया है.
नेटवर्क का उद्देश्य विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच तेजी से सूचनाओं और बेहतर प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान कर अपराधियों को उनकी अवैध कमाई से वंचित करना है. फिलहाल ARIN-AP में 32 सदस्य क्षेत्राधिकार और 10 पर्यवेक्षक संगठन शामिल हैं. इनमें इंटरपोल, UNODC, विश्व बैंक और अन्य क्षेत्रों के एसेट रिकवरी नेटवर्क शामिल हैं.
2024 में भारत को मिली थी अध्यक्षता की जिम्मेदारी भारत को वर्ष 2024 में सिडनी में हुई ARIN-AP बैठक के दौरान स्टीयरिंग ग्रुप में शामिल किया गया था और उसी समय वर्ष 2026 के लिए नेटवर्क की अध्यक्षता की जिम्मेदारी भारत को सौंपी गई थी. इस साल भारत पहली बार ARIN-AP की वार्षिक बैठक की मेजबानी कर रहा है.
अपराध की कमाई की वसूली के हर चरण पर जोर
उद्घाटन संबोधन में ईडी डारेक्टर ने कहा कि एसेट रिकवरी की प्रक्रिया में अपराध से अर्जित संपत्ति की ट्रेसिंग, सुरक्षित करना, जब्ती, प्रबंधन और वापसी जैसे कई चरण शामिल हैं. किसी भी चरण में कमी रहने पर पूरा मामला प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग शुरुआती चरणों में मजबूत है, लेकिन सीमा पार जब्ती, दूसरे देशों के आदेशों को लागू करने और संपत्तियों की वापसी जैसे चरणों में अक्सर देरी होती है.
इस दौरान ईडी डायरेक्टर ने कहा कि हाल के मामलों में ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म, साइबर फ्रॉड, वर्चुअल एसेट्स, पेमेंट एग्रीगेटर्स और गेटवे के दुरुपयोग, शेयर कीमतों में हेरफेर और विदेशों में धन भेजने के लिए पेशेवर प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग जैसे मामलों से जुड़ी रकम तेजी से सीमा पार कर रही है. उन्होंने बताया कि अप्रैल 2024 से ईडी को मिले सहयोग अनुरोधों में से करीब 90 प्रतिशत अनुरोधों को पूरी तरह या आंशिक रूप से पूरा किया गया है.
उन्होंने कहा किपीएमएलए के तहत भारत विदेशों में मौजूद संपत्तियों पर रोक लगाने और उन्हें जब्त करने की कार्रवाई कर सकता है. विदेशों में संपत्ति उपलब्ध न होने की स्थिति में समान मूल्य की संपत्ति के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है.
भारत की अध्यक्षता में दो प्राथमिकताएं
भारत की अध्यक्षता के दौरान नेटवर्क के लिए दो प्रमुख प्राथमिकताएं तय की गई हैं—सहयोग अनुरोधों का तेजी से जवाब देना और मामलों को अंतिम चरण तक पहुंचाना. ईडी डायरेक्टर ने सुझाव दिया कि नेटवर्क उन मामलों की संख्या पर भी नजर रखे, जिनमें ARIN-AP के सहयोग से संपत्तियां वास्तव में जब्त कर पीड़ितों या संबंधित राज्य को वापस की गईं. बैठक में 29 सितंबर को सीमा पार संपत्तियों की ट्रेसिंग, अनौपचारिक सहयोग, वास्तविक लाभार्थी संबंधी जानकारी, वर्चुअल एसेट्स को फ्रीज करने और इंटरपोल सिल्वर नोटिस जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. 30 सितंबर को जब्त संपत्तियों के प्रबंधन और पीड़ितों को संपत्तियां लौटाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी.
इसके साथ ही भारत से सिंगापुर को वर्ष 2027 के लिए ARIN-AP की अध्यक्षता हस्तांतरित की जाएगी. बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी लाना और अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती के बाद उन्हें वास्तविक रूप से पीड़ितों या संबंधित राज्य को वापस करने की प्रक्रिया को मजबूत करना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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