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अब ब्रांड्स के नाम से पहचाने जाएंगे रेलवे प्लेटफॉर्म, नंबर से पहले होगा कंपनियों का प्रचार; कमाई बढ़ाने का नया फॉर्मूला

भारतीय रेलवे ने अपनी आय बढ़ाने और गैर-किराया राजस्व मजबूत करने के लिए व्यस्त स्टेशनों के प्लेटफॉर्म्स के नामकरण अधिकार निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया फिर शुरू कर दी है. इसके तहत प्लेटफॉर्म नंबर से पहले ब्रांड का नाम बोला जाएगा और विजुअल ब्रांडिंग भी की जाएगी.

Indian Railway New Rules

रेलवे की नई कमाई स्कीम

Indian Railway New Rules: भारतीय रेल अब सिर्फ यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का जरिया भर नहीं रहने वाली है, बल्कि आने वाले दिनों में देश के सबसे बड़े कमर्शियल और विज्ञापन केंद्रों के रूप में नजर आएगी. उत्तर रेलवे ने अपने नेटवर्क के व्यस्त और ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म्स के नामकरण के अधिकार यानी ‘नेमिंग राइट्स’ निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया एक बार फिर से शुरू कर दी है. इस नए बदलाव के बाद स्टेशनों पर ट्रेन पकड़ने का पूरा अनुभव ही बदल जाने वाला है.

प्लेटफॉर्म की पारंपरिक पहचान में होगा बदलाव

इस नीति के जमीन पर उतरते ही प्लेटफॉर्म्स की सालों पुरानी पहचान बदल जाएगी. जब यात्री स्टेशन के अंदर कदम रखेंगे, तो उन्हें सिर्फ पारंपरिक प्लेटफॉर्म नंबर 1, 2 या 3 नहीं दिखाई देंगे, बल्कि इन नंबरों से ठीक पहले किसी बड़े व्यापारिक ब्रांड या कंपनी का नाम स्पष्ट रूप से जुड़ा हुआ मिलेगा. हालांकि, रेलवे ने साफ किया है कि तंबाकू, शराब या ड्रग्स से जुड़े किसी भी तरह के विज्ञापनों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी, ताकि सामाजिक मर्यादा बनी रहे.

रेलवे की कमाई बढ़ाने की बड़ी रणनीति

यह पूरा फैसला रेलवे की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह यात्री किराए और माल ढुलाई पर से अपनी वित्तीय निर्भरता को कम करना चाहती है. गैर-किराया राजस्व (Non-Fare Revenue) के जरिए रेलवे अपने खाली पड़े परिसरों, ओवरब्रिज, दीवारों और भारी भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म्स का व्यावसायिक उपयोग करके हर साल करोड़ों रुपये की नियमित कमाई जुटाने की तैयारी में है.

पूरी तरह बदल जाएगी अनाउंसमेंट और ब्रांडिंग

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद स्टेशनों के अंदर का नजारा और वहां गूंजने वाली आवाजें दोनों बदल जाएंगी. जिस भी निजी कंपनी को किसी प्लेटफॉर्म का कमर्शियल टेंडर मिलेगा, उसे उस पूरे प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर ब्रांडिंग करने की अनुमति दी जाएगी.

अनाउंसमेंट का बदला हुआ अंदाज: जब भी कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आएगी या रवाना होगी, तो पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर होने वाली घोषणा का तरीका बदल जाएगा. सामान्य तौर पर पहले कहा जाता था “कृपया ध्यान दें, गाड़ी संख्या… प्लेटफॉर्म नंबर 16 पर आ रही है.” अब नए प्रारूप में प्लेटफॉर्म संख्या बोलने से पहले संबंधित कंपनी का नाम जोड़ा जाएगा, जैसे- “कृपया ध्यान दें, गाड़ी संख्या… [ब्रांड का नाम] प्लेटफॉर्म नंबर 16 पर आ रही है.”

विजुअल ब्रांडिंग: सिर्फ ऑडियो ही नहीं, बल्कि विजुअल स्तर पर भी भारी बदलाव देखने को मिलेगा. प्लेटफॉर्म के प्रवेश द्वार, सीढ़ियों की रेलिंग, खंभों, दिशा-सूचक बोर्डों और दीवारों पर उसी कंपनी के रंग, लोगो और प्रचार सामग्री को प्रमुखता से सजाया जाएगा.

स्टेशनों पर यात्रियों का समय और कॉर्पोरेट मौका

किसी भी सामान्य विज्ञापन बोर्ड की तुलना में रेलवे प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का ठहराव (वेटिंग टाइम) काफी ज्यादा होता है. ट्रेन का इंतजार करते समय यात्री स्वाभाविक रूप से चारों तरफ देखते हैं. ऐसे में कंपनियों के पास सीधे और लंबे समय तक ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींचने का यह एक बेहतरीन मौका होगा.

क्या है इसके पीछे का इतिहास?

भारतीय रेल के इतिहास में स्टेशनों और प्लेटफॉर्म्स की पहचान हमेशा से प्रशासनिक और सेवा-आधारित रही है. आजादी के बाद से ही प्लेटफॉर्म्स को केवल अंकों के क्रम में रखा जाता था, ताकि आम या कम पढ़े-लिखे यात्री भी बिना किसी भ्रम के अपनी ट्रेन तक आसानी से पहुंच सकें. प्लेटफॉर्म्स पर केवल रेलवे के मानक नीले और सफेद रंग के आधिकारिक सूचना पट होते थे.

लेकिन साल 2022 में उत्तर रेलवे ने इस परंपरा को तोड़ते हुए एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी. इसके तहत नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के कुछ प्लेटफॉर्म्स के नामकरण के अधिकार निजी कंपनियों को दिए गए थे. खाद्य तेल और दैनिक उपभोग की वस्तुएं बनाने वाले एक समूह ने प्लेटफॉर्म नंबर 16 और 14-15 के आगे अपने ब्रांड्स के नाम जोड़े थे, जिससे रेलवे को एक साल के अनुबंध से करीब एक करोड़ रुपये की शुद्ध आय हुई थी.

हालांकि बाद में यह योजना विवादों में आ गई थी. जब देश के सबसे प्रमुख स्टेशनों पर कमर्शियल नाम सुनाई देने लगे, तो लोगों ने सवाल उठाया कि क्या राजस्व कमाने की होड़ में रेलवे अपनी ऐतिहासिक विरासत को पीछे छोड़ रहा है. रेल मंत्रालय तक मामला पहुंचने और यात्रियों में भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका के चलते तब इस पूरी योजना पर रोक लगा दी गई थी.

दो साल बाद सख्त नियमों के साथ वापसी

लगभग दो साल तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद रेलवे ने अब इस योजना को फिर से उतारने का फैसला किया है. इस बार रेलवे बोर्ड ने बहुत ही सख्त मानक तय किए हैं:

स्टेशन का मूल और ऐतिहासिक नाम पूरी तरह अपरिवर्तित रहेगा, उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं होगी.

ब्रांडिंग का अधिकार केवल प्लेटफॉर्म के स्तर तक ही सीमित रहेगा.

टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों के चयन में कड़े नियम लागू किए गए हैं ताकि किसी भी विवादित उत्पाद का प्रचार न हो सके.

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किन स्टेशनों पर दिखेगा यह बदलाव?

उत्तर रेलवे ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और जम्मू के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों की सूची तैयार की है. इनमें प्रयागराज संगम, वाराणसी कैंट, लखनऊ जंक्शन (चारबाग), बरेली जंक्शन, मुरादाबाद, मेरठ सिटी, सहारनपुर, अंबाला छावनी और जम्मूतवी जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं, जहां रोजाना लाखों यात्रियों का आना-जाना होता है.

इस कमाई से क्या होगा फायदा?

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्लेटफॉर्म्स के नामकरण से मिलने वाले इस अतिरिक्त राजस्व को सीधे तौर पर स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं बढ़ाने में खर्च किया जाएगा. इस पैसे से आधुनिक और आरामदायक बेंचें लगेंगी, चौबीसों घंटे शुद्ध पेयजल के लिए नए वाटर कियोस्क और शौचालयों का आधुनिकीकरण होगा. इसके अलावा बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों की सहूलियत के लिए नए एस्केलेटर, लिफ्ट और मल्टी-कलर एलईडी ट्रेन इंडिकेटर लगाए जाएंगे.

देश के बड़े महानगरों की मेट्रो प्रणालियों में स्टेशनों का कॉर्पोरेट नामकरण मॉडल पिछले एक दशक से बेहद सफल रहा है. अब भारतीय रेलवे भी उसी आधुनिक व्यावसायिक ढांचे को अपनाकर अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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