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स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, दायर की हस्तक्षेप याचिका

कॉमेडियन कुणाल कामरा ने अभिव्यक्ति की आजादी और विधायी विशेषाधिकारों के संतुलन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ के समक्ष अर्जी दाखिल की है. 6 अक्टूबर को सुनवाई होगी.

Kunal Kamra Supreme Court Intervention Application Freedom of Speech Legislative Privilege
Edited by Vaibhav Gupta

मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है. कामरा ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विधायी विशेषाधिकारों के बीच संबंधों से जुड़े इस बेहद महत्वपूर्ण मामले में अपनी दलीलें रखने की अनुमति मांगी है. यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ के पास लंबित है, जिस पर 6 अक्टूबर को सुनवाई होनी तय हुई है.

महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही से सीधा संबंध

कामरा ने अपनी अर्जी में तर्क दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 194(3) के तहत मिलने वाले विधायी विशेषाधिकार और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को मिली अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन का सवाल उनके खिलाफ महाराष्ट्र विधानमंडल में चल रही विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही पर सीधे तौर पर असर डालता है. इसी वजह से उन्होंने सात जजों की पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखने की मांग की है.

‘विशेषाधिकारों से नहीं दबाया जा सकता मौलिक अधिकार’

याचिका में कुणाल कामरा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि विधायी विशेषाधिकारों का इस्तेमाल किस सीमा तक संभव है और क्या इन शक्तियों के जरिए किसी नागरिक की बोलने की आजादी को सीमित किया जा सकता है. उन्होंने दलील दी कि नागरिकों की आवाज दबाने के लिए विशेषाधिकारों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद को कमजोर करता है. उनके मुताबिक, ऐसे अधिकारों का प्रयोग नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलने के लिए बिल्कुल नहीं किया जा सकता.

राजनीतिक व्यंग्य से शुरू हुआ पूरा विवाद

यह पूरा विवाद कामरा के एक शो से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने साल 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन, उद्धव ठाकरे के इस्तीफे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बनी नई सरकार पर व्यंग्य कसा था. आरोप है कि उन्होंने एक पैरोडी गाने में शिंदे के लिए ‘गद्दार’ शब्द का इस्तेमाल किया था. वीडियो वायरल होने के बाद विधायक मुर्जी कांजी पटेल की शिकायत पर खार पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2025 को कामरा को याचिका लंबित रहने तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी. कामरा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मामले में अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है.

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-भारत एक्सप्रेस



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