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डिप्रेशन में देश के युवा! उच्च शिक्षा संस्थानों के 15% छात्र अत्यधिक तनाव में, सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में खुलासा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स के सर्वे में करीब 2.43 लाख उच्च शिक्षा छात्रों की प्रतिक्रियाएं शामिल की गईं.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने खुलासा किया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों के करीब 15 प्रतिशत छात्रों ने स्वीकार किया है कि पिछले 6 महीनों में वे ऐसे दौर से गुजरे जब उन्होंने खुद को बेहद परेशान या तनावग्रस्त महसूस किया, जबकि 9 फीसदी छात्रों ने आत्महत्या के ख्याल आने की बात कही है.

ये चुकाने वाले आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक टास्क फोर्स छात्र कल्याण पर अपनी अहम रिपोर्ट तैयार कर रही है. यह टास्क फोर्स आईआईटी दिल्ली और आईआईटी बॉम्बे में 2 छात्रों की मौत के बाद बनाई गई थी. देशभर में किए गए सर्वे में करीब 2.43 लाख छात्रों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर पता चला है कि बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई, करियर, रोजगार और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े दबाव का सामना कर रहे है.

पढ़ाई के साथ करियर और नौकरी की चिंता

सर्वे में सामाजिक अलगाव, भेदभाव, आर्थिक परेशानियां, शैक्षणिक दबाव और संस्थागत व्यवस्थाओं को भी छात्र तनाव से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के तौर पर देखा गया है. पढ़ाई के साथ करियर और नौकरी का दबाव छात्रों पर सिर्फ परीक्षा और अच्छे नंबर लाने का दबाव नहीं है. उच्च शिक्षा के दौरान प्लेसमेंट, नौकरी, करियर और भविष्य को लेकर चिंता भी मानसिक दबाव का बड़ा कारण बन रही है. अच्छे ग्रेड, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं, स्कॉलरशिप और रोजगार के सीमित अवसरों के बीच छात्रों को लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की चिंता रहती है.

सर्वे में जवाब देने वाले करीब 46 फीसदी छात्रों ने खुद को उच्च शिक्षा हासिल करने वाला अपने परिवार का पहला सदस्य बताया. ऐसे में छात्रों में भी कॉलेज या विश्वविद्यालय का माहौल, भाषा, सामाजिक नेटवर्क और अकादमिक व्यवस्था कई बार नई चुनौती बन जाती है.

सर्वे में शामिल छात्रों में करीब 67 फीसदी एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्र शामिल थे. टास्क फोर्स पहले भी उच्च शिक्षा में सामाजिक भेदभाव जैसे दस्तावेजों की जांच कर चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में छात्र आत्महत्याओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करने के लिए नेशनल टास्क फोर्स गठित की थी.

टास्क फोर्स को आत्महत्याओं के प्रमुख कारणों की पहचान करने, मौजूदा कानूनों और संस्थागत व्यवस्थाओं की समीक्षा करने तथा छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुधारों की सिफारिश करने का जिम्मा दिया गया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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