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संस्कार भारती के ‘कला संकुल’ में कथक पर विशेष कला संगोष्ठी: गौरी दिवाकर ने साझा किए कला-यात्रा के अनुभव

संस्कार भारती के ‘कला संकुल’ में ‘समकालीन कथक, परंपरा और नवाचार’ पर संगोष्ठी आयोजित हुई. प्रसिद्ध नृत्यांगना गौरी दिवाकर ने कथक के बदलते स्वरूप और अनुभवों पर विचार साझा किए.

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संस्कार भारती के ‘कला संकुल’ (33, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली) में रविवार, 27 सितंबर को ‘भारतीय दृष्टि से समकालीन कथक, परंपरा, नवाचार और अभिव्यक्ति’ विषय पर एक भव्य कला संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. इस विशेष कार्यक्रम में कथक की समृद्ध परंपरा, उसके शास्त्रीय अनुशासन, वर्तमान स्वरूप और आधुनिक समय में इसमें हो रहे नए प्रयोगों पर विचार-विमर्श किया गया. संगोष्ठी में प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना श्रीमती गौरी दिवाकर मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं.

शास्त्रीय गायन से हुई कार्यक्रम की भावपूर्ण शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. दीपित वत्स के शानदार एकल शास्त्रीय गायन से हुआ. उनके गायन ने पूरे वातावरण को शास्त्रीय संगीत की गरिमा से सराबोर कर दिया. प्रस्तुति में सुश्री युवराशी ने तानपुरे पर संगत की, जबकि सूरज कुमार और अनमोल विमल ने क्रमशः तबले और हारमोनियम पर अपनी सधी हुई संगत से गायन को प्रभावी आधार प्रदान किया. स्वर और लय के इस सुंदर सामंजस्य ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.

प्रीति सिन्हा समूह की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन

गायन के उपरांत श्रीमती प्रीति सिन्हा समूह द्वारा कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई. समूह के कलाकारों ने कथक की पारंपरिक नृत्यगतियों, ताल, लय और भावाभिनय को बेहद खूबसूरती से मंच पर उकेरा. पैरों की तालबद्ध तत्कार, हस्तमुद्राओं और भाव-भंगिमाओं के अद्भुत संतुलन ने दर्शकों को बांधे रखा. कलाकारों ने शास्त्रीय मर्यादा को बनाए रखते हुए मंचीय रूप से एक ऊर्जावान प्रस्तुति दी.

परंपरा और नवाचार में संतुलन जरूरी: गौरी दिवाकर

नृत्य प्रस्तुति के बाद मुख्य अतिथि गौरी दिवाकर ने अपने कला-जीवन के लंबे अनुभवों और साधना को साझा करते हुए विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि कथक की परंपरा कलाकार की अनवरत साधना और प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ती है.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक समय में नए प्रयोग करते हुए भी कथक की मूल परंपरा, उसकी लय-ताल और भाव-पक्ष की पहचान को बनाए रखना अनिवार्य है. उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों की भूमिका और बदलते मंचीय परिवेश पर भी अपने विचार रखे.

कला संकुल परिवार का सामूहिक प्रयास

कार्यक्रम का सफल मंच संचालन विश्वदीप ने किया, जबकि संयोजिका स्नेहा मुखर्जी ने आयोजन के बेहतरीन समन्वय में प्रमुख भूमिका निभाई. समापन पर श्रुति सिन्हा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया. आयोजन को सुचारू बनाने में राज उपाध्याय, श्राबोनी साहा (मुनमुन), ऋतम्भरा, प्रदीप पाठक और हर्षित सहित कला संकुल परिवार का विशेष योगदान रहा.

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-भारत एक्सप्रेस



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