Voter List Investigation: वकीलों के संगठन लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन ने एसआईआर की कानूनी वैधता और असर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पांच पूर्व जजों के आयोग गठित किया है. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज मदन बी लोकुर करेंगे.
आयोग की संरचना, जांच का दायरा और रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा
आयोग के अन्य सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके पटनायक, जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बदर दुर्रेज अहमद, हाई कोर्ट की पूर्व जस्टिस रेखा शर्मा और पटना हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अंजना प्रकाश शामिल है. आयोग जांच करेगा कि चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया संविधान और कानून के अनुरूप है या नहीं.
साथ ही यह भी देखेगा कि इससे मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा. आयोग का यह भी काम होगा कि क्या एसआईआर के दौरान हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई और अपात्र एंट्री को सही प्रक्रिया के तहत हटाया गया. कमिटी देशभर में जनसुनवाई, मतदाता सूची से नाम जोड़ने-काटने के आंकड़ों का विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.जिसे दिसंबर 2026 तक सार्वजनिक किया जाएगा.
दिग्गज वकीलों की कानूनी मदद और देशव्यापी जनसुनवाई की योजना
एलएएफसी के अनुसार कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, चंद्र उदय सिंह, प्रशांतो चंद्र सेन, राजू रामचंद्रन, रेबेका जॉन, वरिशा फरासत और वृंदा ग्रोवर कानूनी सहायता प्रदान करेंगे. प्रेस रिलीज में कहा गया है कि आयोग अपने नतीजों और सिफारिशों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगा. न तो प्रायोजक संगठन और न ही सहयोगी समितियां पूर्व जजों के मुख्य फैसलों या निष्कर्षो को प्रभावित करेंगी.
एलएएफसी के मुताबिक आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में सार्वजनिक सुनवाई करेगा. इसके लिए पूर्ण पीठ और क्षेत्रीय पीठ बनाई जाएगी. जो विभिन्न्न जगहों पर जाकर लोगों से बातचीत करेगी. इसमें तीन तरह के पक्ष को शामिल किया जाएगा. इसमें एसआईआर से प्रभावित नागरिक, नागरिक समाज के संगठन और चुनाव और कानून से जुड़ें विशेषज्ञ शामिल होंगे.
-भारत एक्सप्रेस
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